डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बहेरिया गांव में सोमवार रात श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथावाचक आलोकानंद शास्त्री ने भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने रासलीला, भगवान का मथुरा गमन, कंस वध, संदीपनी आश्रम में विद्या और उद्धव-गोपी संवाद जैसे प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला। शास्त्री ने बताया कि श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह आदर्श दांपत्य जीवन और प्रेम का प्रतीक है। श्रीमद्भागवत कथा में रासलीला के संबंध में महारास के पांच अध्याय गाए जाते हैं, जिन्हें भागवत के प्राण माना जाता है। यह जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का रूपक है, जिससे भक्त भवसागर पार कर वृंदावन की भक्ति प्राप्त करते हैं। कथावाचक ने मथुरा गमन और कंस वध प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यह अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि मनुष्य को हमेशा भक्ति मार्ग पर चलना चाहिए, जिससे जीवन सफल हो सके। इस अवसर पर आचार्य सुमंत शास्त्री, संदीप शास्त्री, इंद्रजीत उपाध्याय सहित कई लोग उपस्थित रहे।
बहेरिया में श्रीमद्भागवत कथा:कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का हुआ वर्णन
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बहेरिया गांव में सोमवार रात श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथावाचक आलोकानंद शास्त्री ने भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने रासलीला, भगवान का मथुरा गमन, कंस वध, संदीपनी आश्रम में विद्या और उद्धव-गोपी संवाद जैसे प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला। शास्त्री ने बताया कि श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह आदर्श दांपत्य जीवन और प्रेम का प्रतीक है। श्रीमद्भागवत कथा में रासलीला के संबंध में महारास के पांच अध्याय गाए जाते हैं, जिन्हें भागवत के प्राण माना जाता है। यह जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का रूपक है, जिससे भक्त भवसागर पार कर वृंदावन की भक्ति प्राप्त करते हैं। कथावाचक ने मथुरा गमन और कंस वध प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यह अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि मनुष्य को हमेशा भक्ति मार्ग पर चलना चाहिए, जिससे जीवन सफल हो सके। इस अवसर पर आचार्य सुमंत शास्त्री, संदीप शास्त्री, इंद्रजीत उपाध्याय सहित कई लोग उपस्थित रहे।





































