Advertisement
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत मंगलवार को राजकीय इंटर कॉलेज ककरहवा में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान द्वारा अपने 100 दिवसीय जागरूकता अभियान के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम में छात्रों को बाल विवाह के कानूनी पहलुओं, इसके सामाजिक, मानसिक और शारीरिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि कम उम्र में विवाह से शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की संभावनाएँ कैसे प्रभावित होती हैं। विद्यार्थियों को बाल अधिकार, बाल श्रम निषेध कानून, बाल संरक्षण और 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जागरूक किया गया। एसएसबी 43वीं वाहिनी के उपनिरीक्षक सुमित कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह बच्चों के सपनों को पूरा होने से रोकता है। उन्होंने शिक्षा को प्राथमिकता देने और बाल विवाह से दूर रहने का आह्वान किया। कुमार ने बच्चों को बाल श्रम, मानव तस्करी और स्वच्छता के महत्व के बारे में भी जागरूक किया। कॉलेज के प्रधानाचार्य अजय कुमार श्रीवास्तव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में 30 वर्ष की आयु तक विवाह में देरी असामान्य नहीं है। उन्होंने छात्रों को पहले अपनी शिक्षा पूरी करने, स्वयं को सक्षम बनाने और फिर सही समय पर विवाह का निर्णय लेने की सलाह दी। कार्यक्रम के समापन पर मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान (MSE MVS) ने बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। छात्रों को यह भी बताया गया कि बाल विवाह, शोषण या बाल अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में तुरंत संबंधित विभाग या हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। इस अवसर पर कॉलेज के शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं, एसएसबी के एएसआई रविकांत यादव, आरक्षी पवन कुमार, पवन, महिला आरक्षी अमृता, सीमा तथा मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के एमआईएस रोहित दुबे और जीपीएफ राम शंकर सहित कई लोग उपस्थित रहे।








































