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बलरामपुर में टीबी उन्मूलन अभियान में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने खराब प्रदर्शन करने वाली टीबी यूनिटों के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) और सीनियर टीबी लैब सुपरवाइजर (एसटीएलएस) का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला मंगलवार को सीएमओ कार्यालय में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि “टीबी मुक्त भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करेगा, उसे ही सम्मान मिलेगा।” बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अजय कुमार शुक्ला, डीएचईओ अरविंद मिश्रा, जिला कार्यक्रम समन्वयक अविनाश सिंह, सूर्यमणि तिवारी, महेंद्र शुक्ला सहित सभी टीबी यूनिटों के एसटीएस और एसटीएलएस मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कुछ यूनिटों में मरीज खोजने की गति धीमी थी, सैंपल कलेक्शन में सुस्ती थी, दवाओं की निगरानी कमजोर थी और मरीजों का फॉलोअप भी अधूरा था। इसके अतिरिक्त, सीएमओ ने निजी अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने, मरीजों की समयबद्ध स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने और समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया। बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू सीएमओ डॉ. रस्तोगी का नवीन प्रयोग रहा। उन्होंने सीधे टीबी मरीजों को वीडियो कॉल कर उनके स्वास्थ्य, दवा लेने की नियमितता और उपचार में आ रही किसी भी समस्या के बारे में जानकारी ली। डॉ. रस्तोगी ने निजी चिकित्सकों से भी वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़कर अपील की कि वे टीबी के संदिग्ध मरीजों की तुरंत सूचना दें, ताकि उन्हें जल्द से जल्द उपचार प्रक्रिया से जोड़ा जा सके। डॉ. रस्तोगी ने जोर देकर कहा कि टीबी उन्मूलन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि “लक्ष्य बड़ा है, लेकिन हमारा इरादा उससे भी बड़ा होना चाहिए। हर हाल में बलरामपुर को निर्धारित समय सीमा के भीतर टीबी मुक्त बनाना है।”




































