महराजगंज के फरेंदा में कड़ाके की ठंड के कारण अलाव जलाने के लिए लकड़ी की मांग बढ़ गई है। इसके चलते जंगल किनारे बसे ग्रामीण अवैध रूप से पेड़ों की कटाई कर रहे हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। वन विभाग की टीमें रात-दिन गश्त कर रही हैं, लेकिन भीषण ठंड और घने जंगलों के कारण उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फरेंदा, आनंदनगर, भइया फरेन्दा, गिरघरपुर और बरडाड़ जैसे वन क्षेत्रों में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अलाव के बिना ठंड की रातें काटना मुश्किल हो गया है वन रेंज अधिकारी अनिल सिंह ने बताया कि वनकर्मी दिन-रात गश्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ठंड के कारण लोग लकड़ी की तलाश में जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। हमारी टीमें जंगल के किनारों पर तैनात हैं, लेकिन घना जंगल और अंधेरा गश्त में बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। अवैध कटाई के कई मामले पकड़े जाते हैं, लेकिन अधिकांश लोग चालाकी से बच निकलते हैं।” वन विभाग ने ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए पंचायत स्तर पर बैठकें भी आयोजित की हैं। विभाग सूखी टहनियों के वितरण और सरकारी योजनाओं के माध्यम से वैकल्पिक व्यवस्था पर जोर दे रहा है, लेकिन ग्रामीणों का अपेक्षित सहयोग न मिलने से समस्या बनी हुई है। जिले में लगभग 20 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जिसमें साल और सागौन जैसे मूल्यवान पेड़ शामिल हैं। ठंड के मौसम में हर साल 10-15 प्रतिशत वन क्षेत्र को नुकसान होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवैध कटाई से मिट्टी का कटाव, बाढ़ का खतरा और वन्यजीवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वन विभाग ने उच्च अधिकारियों को अतिरिक्त बल की मांग के लिए रिपोर्ट भेजी है। स्थानीय निवासी राधेश्याम ने कहा, “अलाव आवश्यक है, लेकिन जंगल बचाना भी हमारी जिम्मेदारी है। विभाग को गैस सिलेंडर या कोयला वितरित करना चाहिए।” पुष्पा देवी ने बताया, “रात में ठंड से नींद नहीं आती, लेकिन पेड़ों की कटाई गलत है।” इस समस्या से निपटने के लिए वन विभाग अब ड्रोन से निगरानी की योजना बना रहा है।
महराजगंज में लकड़ी का अवैध कटान: जंगल की गश्त कर रहें अधिकारी, जागरूकता के लिए पंचायत स्तर पर बैठकें आयोजित – Pharenda News
महराजगंज के फरेंदा में कड़ाके की ठंड के कारण अलाव जलाने के लिए लकड़ी की मांग बढ़ गई है। इसके चलते जंगल किनारे बसे ग्रामीण अवैध रूप से पेड़ों की कटाई कर रहे हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। वन विभाग की टीमें रात-दिन गश्त कर रही हैं, लेकिन भीषण ठंड और घने जंगलों के कारण उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फरेंदा, आनंदनगर, भइया फरेन्दा, गिरघरपुर और बरडाड़ जैसे वन क्षेत्रों में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अलाव के बिना ठंड की रातें काटना मुश्किल हो गया है वन रेंज अधिकारी अनिल सिंह ने बताया कि वनकर्मी दिन-रात गश्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ठंड के कारण लोग लकड़ी की तलाश में जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। हमारी टीमें जंगल के किनारों पर तैनात हैं, लेकिन घना जंगल और अंधेरा गश्त में बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। अवैध कटाई के कई मामले पकड़े जाते हैं, लेकिन अधिकांश लोग चालाकी से बच निकलते हैं।” वन विभाग ने ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए पंचायत स्तर पर बैठकें भी आयोजित की हैं। विभाग सूखी टहनियों के वितरण और सरकारी योजनाओं के माध्यम से वैकल्पिक व्यवस्था पर जोर दे रहा है, लेकिन ग्रामीणों का अपेक्षित सहयोग न मिलने से समस्या बनी हुई है। जिले में लगभग 20 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जिसमें साल और सागौन जैसे मूल्यवान पेड़ शामिल हैं। ठंड के मौसम में हर साल 10-15 प्रतिशत वन क्षेत्र को नुकसान होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवैध कटाई से मिट्टी का कटाव, बाढ़ का खतरा और वन्यजीवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वन विभाग ने उच्च अधिकारियों को अतिरिक्त बल की मांग के लिए रिपोर्ट भेजी है। स्थानीय निवासी राधेश्याम ने कहा, “अलाव आवश्यक है, लेकिन जंगल बचाना भी हमारी जिम्मेदारी है। विभाग को गैस सिलेंडर या कोयला वितरित करना चाहिए।” पुष्पा देवी ने बताया, “रात में ठंड से नींद नहीं आती, लेकिन पेड़ों की कटाई गलत है।” इस समस्या से निपटने के लिए वन विभाग अब ड्रोन से निगरानी की योजना बना रहा है।





































