बस्ती में हर्रैया विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत शंकरपुर स्थित मिश्रित मत्स्य पालन परिक्षेत्र वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। प्राथमिक विद्यालय के पास बना यह परिक्षेत्र कभी स्थानीय मत्स्य पालकों के लिए मछली पालन का प्रमुख केंद्र हुआ करता था, लेकिन अब तालाब सूखे पड़े हैं और परिक्षेत्र अपनी पहचान खोता जा रहा है। सरकार द्वारा वर्षों पहले स्थापित इस परिक्षेत्र का उद्देश्य किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले मछली के बच्चे उपलब्ध कराना था। लगभग दस बीघा भूमि में छह तालाब खोदे गए थे। इनके रखरखाव के लिए एक सुपरवाइजर और एक चौकीदार की तैनाती भी की गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व तक बारिश के मौसम में तालाबों में विभिन्न प्रजातियों की मछलियां डाली जाती थीं। मत्स्य पालकों को यहां से मछली के बच्चे, तकनीकी जानकारी और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिलती थीं। इससे आसपास के किसानों को मछली पालन में काफी लाभ होता था। लेकिन बीते कुछ वर्षों से परिक्षेत्र में तैनात सुपरवाइजर नियमित रूप से अनुपस्थित रहते हैं, जबकि चौकीदार भी कभी-कभार ही दिखाई देता है। कर्मचारियों की लगातार गैरहाजिरी के कारण तालाबों की देखरेख नहीं हो पा रही है और सभी तालाब सूख चुके हैं। कुछ समय पहले विभाग द्वारा सुपरवाइजर और चौकीदार के लिए आवास भी बनवाए गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में वे भी जर्जर होकर गिर गए। आवासों की ईंटें तक गायब हो चुकी हैं। विभागीय उदासीनता के चलते लगभग दो एकड़ भूमि में फैला यह मत्स्य पालन परिक्षेत्र अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
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