महराजगंज जिला मुख्यालय पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और एडवोकेट विजय सिंह ने मनरेगा योजना को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने 2005 में गरीबों, खेतिहर मजदूरों और औद्योगिक श्रमिकों को रोजगार का कानूनी अधिकार देने के उद्देश्य से मनरेगा कानून बनाया था। विजय सिंह ने मनरेगा को केवल एक योजना नहीं, बल्कि मजदूरों का कानूनी हक बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता भी इस योजना का एक महत्वपूर्ण प्रावधान था। उनके अनुसार, इस योजना ने लाखों बेसहारा मजदूरों को रोजगार प्रदान किया, गांवों से कुशल और अकुशल श्रमिकों के पलायन को रोका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब प्रवासी मजदूर अपने गांवों को लौटे, तब मनरेगा ने उन्हें संकट की घड़ी में गांव में ही रोजगार देकर संजीवनी का काम किया। हालांकि, विजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से मनरेगा को लगातार कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि योजना के बजट में कटौती की गई है। साथ ही, महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी इस योजना में केंद्र सरकार का हिस्सा 90% से घटाकर 60% कर दिया गया है, जबकि राज्यों पर 10% से बढ़ाकर 40% का बोझ डाल दिया गया है। विजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्षी राज्यों को समय पर जीएसटी का भुगतान नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में, राज्यों के लिए मनरेगा में 40% हिस्सा वहन करना असंभव होगा, जिससे मजदूरों के कानूनी हक का हनन होगा। कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा को कमजोर करने के विरोध में व्यापक आंदोलन का निर्णय लिया है। इसके तहत, 10 जनवरी को प्रेस वार्ता, 11 जनवरी को गांधी प्रतिमा के समक्ष उपवास, 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद, 30 जनवरी को धरना प्रदर्शन, फरवरी में ज्ञापन सौंपना, विधानसभा का घेराव और अंत में बड़े पैमाने पर रैलियां आयोजित करने की योजना है।
निचलौल में मनरेगा मजदूरों का कानूनी हक: विजय सिंह एडवोकेट ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाए ,बोलें कर रही कमजोर – Nichlaul News
महराजगंज जिला मुख्यालय पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और एडवोकेट विजय सिंह ने मनरेगा योजना को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने 2005 में गरीबों, खेतिहर मजदूरों और औद्योगिक श्रमिकों को रोजगार का कानूनी अधिकार देने के उद्देश्य से मनरेगा कानून बनाया था। विजय सिंह ने मनरेगा को केवल एक योजना नहीं, बल्कि मजदूरों का कानूनी हक बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता भी इस योजना का एक महत्वपूर्ण प्रावधान था। उनके अनुसार, इस योजना ने लाखों बेसहारा मजदूरों को रोजगार प्रदान किया, गांवों से कुशल और अकुशल श्रमिकों के पलायन को रोका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब प्रवासी मजदूर अपने गांवों को लौटे, तब मनरेगा ने उन्हें संकट की घड़ी में गांव में ही रोजगार देकर संजीवनी का काम किया। हालांकि, विजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से मनरेगा को लगातार कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि योजना के बजट में कटौती की गई है। साथ ही, महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी इस योजना में केंद्र सरकार का हिस्सा 90% से घटाकर 60% कर दिया गया है, जबकि राज्यों पर 10% से बढ़ाकर 40% का बोझ डाल दिया गया है। विजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्षी राज्यों को समय पर जीएसटी का भुगतान नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में, राज्यों के लिए मनरेगा में 40% हिस्सा वहन करना असंभव होगा, जिससे मजदूरों के कानूनी हक का हनन होगा। कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा को कमजोर करने के विरोध में व्यापक आंदोलन का निर्णय लिया है। इसके तहत, 10 जनवरी को प्रेस वार्ता, 11 जनवरी को गांधी प्रतिमा के समक्ष उपवास, 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद, 30 जनवरी को धरना प्रदर्शन, फरवरी में ज्ञापन सौंपना, विधानसभा का घेराव और अंत में बड़े पैमाने पर रैलियां आयोजित करने की योजना है।









































