सिद्धार्थनगर के खेसरहा ब्लॉक स्थित घोसियारी बाजार के दुर्गा मंदिर परिसर में श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान अयोध्या से पधारे आचार्य धनंजय ने श्रीराम जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आचार्य धनंजय ने बताया कि भगवान श्रीराम ने धरती पर पांच प्रमुख कारणों से अवतार लिया था। उन्होंने शिव-पार्वती संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि माता पार्वती के प्रश्न पर भगवान शिव ने श्रीराम के अवतार के रहस्य को समझाया था। आचार्य ने बताया कि संत कुमारों को भगवान के पार्षदों द्वारा शाप दिए जाने के कारण उन्हें राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा, जिसके उद्धार के लिए भगवान को अवतार लेना पड़ा। आचार्य ने जलंधर वध की कथा का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान ने छल के माध्यम से उसकी पत्नी वृंदा के सतीत्व का भंग किया, जिससे अधर्म का अंत हुआ। कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जब भी धरती पर अधर्म बढ़ता है, भगवान सगुण साकार रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। राम कथा के दौरान कई भजन प्रस्तुत किए गए। इनमें “राम नाम की महिमा” और “अवध में राम आए हैं” जैसे भजन शामिल थे। भजनों और कथा के समन्वय से कार्यक्रम स्थल पर भक्तिपूर्ण वातावरण निर्मित हुआ। कार्यक्रम के अंत में आचार्य धनंजय ने कहा कि श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक चरित्र नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का प्रतीक हैं। उनके जीवन से मर्यादा, सत्य और कर्तव्य का संदेश मिलता है, जिसे अपनाकर समाज को सही दिशा दी जा सकती है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।
घोसियारी बाजार में श्रीराम कथा जारी:अयोध्या के आचार्य धनंजय ने सुनाया श्रीराम जन्म का रहस्य
सिद्धार्थनगर के खेसरहा ब्लॉक स्थित घोसियारी बाजार के दुर्गा मंदिर परिसर में श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान अयोध्या से पधारे आचार्य धनंजय ने श्रीराम जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आचार्य धनंजय ने बताया कि भगवान श्रीराम ने धरती पर पांच प्रमुख कारणों से अवतार लिया था। उन्होंने शिव-पार्वती संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि माता पार्वती के प्रश्न पर भगवान शिव ने श्रीराम के अवतार के रहस्य को समझाया था। आचार्य ने बताया कि संत कुमारों को भगवान के पार्षदों द्वारा शाप दिए जाने के कारण उन्हें राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा, जिसके उद्धार के लिए भगवान को अवतार लेना पड़ा। आचार्य ने जलंधर वध की कथा का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान ने छल के माध्यम से उसकी पत्नी वृंदा के सतीत्व का भंग किया, जिससे अधर्म का अंत हुआ। कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जब भी धरती पर अधर्म बढ़ता है, भगवान सगुण साकार रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। राम कथा के दौरान कई भजन प्रस्तुत किए गए। इनमें “राम नाम की महिमा” और “अवध में राम आए हैं” जैसे भजन शामिल थे। भजनों और कथा के समन्वय से कार्यक्रम स्थल पर भक्तिपूर्ण वातावरण निर्मित हुआ। कार्यक्रम के अंत में आचार्य धनंजय ने कहा कि श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक चरित्र नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का प्रतीक हैं। उनके जीवन से मर्यादा, सत्य और कर्तव्य का संदेश मिलता है, जिसे अपनाकर समाज को सही दिशा दी जा सकती है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।








































