बलरामपुर जनपद के विकास खंड गैसड़ी के भोजपुर ग्राम पंचायत में एक किसान के खेत पर बुलडोजर चला दिया गया। आरोप है कि यह कार्रवाई न्यायालय के वर्ष 2017 के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश की अवहेलना करते हुए की गई। यह घटना तहसील तुलसीपुर क्षेत्र के भोजपुर से सामने आई है, जहां एसडीएम तुलसीपुर की मौजूदगी में प्रशासन और राजस्व विभाग ने एक किसान के खेत पर बुलडोजर चलवाया। पीड़ित किसान राही का कहना है कि उक्त भूमि को लेकर मामला वर्षों पूर्व से न्यायालय में विचाराधीन था। इस पर वर्ष 2017 में माननीय न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट आदेश दिया था। राही के अनुसार, पूर्व में प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में नापी करवाकर उन्हें जमीन का कब्जा दिलवाया गया था, जिस पर उन्होंने लगभग 4 फीट ऊंची दीवार भी बनवाई थी। इसके बावजूद, बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए, प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा। खेत में बनी दीवार को ध्वस्त कर जबरन बुलडोजर चला दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि किसान की जमीन पर बनी दीवार को तोड़कर विपक्षी मैनुद्दीन को जबरन कब्जा दिलवाया गया, जिसमें प्रशासन भी मौजूद था। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई दबंगों के इशारे पर की गई और न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना हुई। इस पूरी कार्रवाई के दौरान प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। हालांकि, किसी भी अधिकारी ने न्यायालय के आदेश को देखने या उसका पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता नहीं समझी। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर जब एसडीएम से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो कोई उचित जवाब नहीं मिला।
बलरामपुर में किसान के खेत पर चला बुलडोजर:एसडीएम की मौजूदगी में 2017 के कोर्ट आदेश की अवहेलना का आरोप
बलरामपुर जनपद के विकास खंड गैसड़ी के भोजपुर ग्राम पंचायत में एक किसान के खेत पर बुलडोजर चला दिया गया। आरोप है कि यह कार्रवाई न्यायालय के वर्ष 2017 के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश की अवहेलना करते हुए की गई। यह घटना तहसील तुलसीपुर क्षेत्र के भोजपुर से सामने आई है, जहां एसडीएम तुलसीपुर की मौजूदगी में प्रशासन और राजस्व विभाग ने एक किसान के खेत पर बुलडोजर चलवाया। पीड़ित किसान राही का कहना है कि उक्त भूमि को लेकर मामला वर्षों पूर्व से न्यायालय में विचाराधीन था। इस पर वर्ष 2017 में माननीय न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट आदेश दिया था। राही के अनुसार, पूर्व में प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में नापी करवाकर उन्हें जमीन का कब्जा दिलवाया गया था, जिस पर उन्होंने लगभग 4 फीट ऊंची दीवार भी बनवाई थी। इसके बावजूद, बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए, प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा। खेत में बनी दीवार को ध्वस्त कर जबरन बुलडोजर चला दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि किसान की जमीन पर बनी दीवार को तोड़कर विपक्षी मैनुद्दीन को जबरन कब्जा दिलवाया गया, जिसमें प्रशासन भी मौजूद था। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई दबंगों के इशारे पर की गई और न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना हुई। इस पूरी कार्रवाई के दौरान प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। हालांकि, किसी भी अधिकारी ने न्यायालय के आदेश को देखने या उसका पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता नहीं समझी। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर जब एसडीएम से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो कोई उचित जवाब नहीं मिला।









































