बलरामपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ के तहत आर्म्स एक्ट के एक आरोपी को सजा दिलाई है। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत दोषी अभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी की जा रही है। यह मामला 21 जून 2005 का है, जब थाना ललिया क्षेत्र से अभियुक्त अखिलेश्वर उर्फ अखिलेश वर्मा पुत्र राम आधार वर्मा के कब्जे से एक अवैध तमंचा बरामद किया गया था। इस संबंध में थाना ललिया में मु0अ0सं0 138/2005 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। उपनिरीक्षक ज्वाला प्रसाद पाण्डेय ने मामले की विवेचना की और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार के निर्देशन में, मॉनिटरिंग सेल के नोडल प्रभारी अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय के नेतृत्व में सहायक अभियोजन अधिकारी विनय वर्मा और प्रभारी मॉनिटरिंग सेल बृजानंद सिंह ने प्रभावी पैरवी की। इसी प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप, न्यायालय JM-I बलरामपुर ने अभियुक्त अखिलेश्वर उर्फ अखिलेश वर्मा को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने उसे जेल में बिताई गई अवधि, न्यायालय उठने तक खड़े रहने और ₹1000 के अर्थदंड की सजा सुनाई।
आर्म्स एक्ट आरोपी को कोर्ट ने सुनाई सजा:बलरामपुर में जेल में बिताई अवधि, कोर्ट उठने तक खड़े रहने और एक हजार जुर्माना
बलरामपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ के तहत आर्म्स एक्ट के एक आरोपी को सजा दिलाई है। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत दोषी अभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी की जा रही है। यह मामला 21 जून 2005 का है, जब थाना ललिया क्षेत्र से अभियुक्त अखिलेश्वर उर्फ अखिलेश वर्मा पुत्र राम आधार वर्मा के कब्जे से एक अवैध तमंचा बरामद किया गया था। इस संबंध में थाना ललिया में मु0अ0सं0 138/2005 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। उपनिरीक्षक ज्वाला प्रसाद पाण्डेय ने मामले की विवेचना की और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार के निर्देशन में, मॉनिटरिंग सेल के नोडल प्रभारी अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय के नेतृत्व में सहायक अभियोजन अधिकारी विनय वर्मा और प्रभारी मॉनिटरिंग सेल बृजानंद सिंह ने प्रभावी पैरवी की। इसी प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप, न्यायालय JM-I बलरामपुर ने अभियुक्त अखिलेश्वर उर्फ अखिलेश वर्मा को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने उसे जेल में बिताई गई अवधि, न्यायालय उठने तक खड़े रहने और ₹1000 के अर्थदंड की सजा सुनाई।






































