बस्ती में 10 साल से खाली पड़े कांशीराम आवास:गरीबों को नहीं मिला करोड़ों की परियोजना का लाभ, DM के प्रयास भी विफल

6
Advertisement

बस्ती में गरीबों के लिए बने 360 कमरों वाले कांशीराम आवास पिछले 10 साल से खाली पड़े हैं। आरटीओ कार्यालय के पास नौ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार यह आवासीय परियोजना प्रशासनिक लापरवाही के कारण आज तक आवंटित नहीं हो पाई है। जरूरतमंद परिवार अभी भी झोपड़ियों या किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। यह योजना साल 2007 में तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा कैली के समीप स्वीकृत की गई थी। लगभग 9 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण कार्य वर्ष 2011 में शुरू हुआ और 2015 में इसे नगर पालिका परिषद को सौंप दिया गया। हालांकि, तब से लेकर आज तक इन आवासों का आवंटन नहीं हो सका है, जिससे योजना का मूल उद्देश्य अधूरा रह गया है। मौजूदा समय में इन आवासों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। आवास तक जाने वाली सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। परिसर में चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। कई कमरों का प्लास्टर झड़ गया है और दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। करोड़ों रुपये की यह सरकारी संपत्ति धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रही है। समाजवादी पार्टी के नेता राम आशीष वर्मा ने आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भवन नगर पालिका परिषद को सौंपा गया था, तभी बुनियादी सुविधाओं और आवंटन की स्पष्ट रूपरेखा तय की जानी चाहिए थी। वर्ष 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और आवंटन की दिशा में प्रयास किए थे। हालांकि, विभागीय अड़चनों, तकनीकी उलझनों और फाइलों की धीमी गति के कारण उनके प्रयास भी सफल नहीं हो सके।

यहां भी पढ़े:  बस्ती में सड़क हादसे में युवक की मौत:बाइक की टक्कर से गंभीर घायल दिनेश ने गोरखपुर में दम तोड़ा
Advertisement