सिद्धार्थनगर के बर्डपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बजहां के नरखोरिया में आयोजित ग्राम चौपाल में राशन वितरण प्रणाली में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्हें वर्षों से निर्धारित मात्रा से कम राशन मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी वे इस संबंध में विरोध करते हैं, तो उन पर दबाव बनाकर उनकी आवाज दबा दी जाती है। ग्रामीण रामू ने आरोप लगाया कि यह समस्या ‘बाप-दादाओं के जमाने से’ चली आ रही है और प्रभावशाली लोग शिकायतें शांत करा देते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, डर और दबाव के कारण कई लोग सच सामने लाने से कतराते हैं, जिसके परिणामस्वरूप राशन घटतौली जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। वहीं, कोटेदार रौवाब के नाती मोबीन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कम राशन मिलता है तो उसे तुरंत शिकायत करनी चाहिए, क्योंकि वितरण पूरी पारदर्शिता से किया जाता है। इस संबंध में पूर्ति निरीक्षक विंध्यवासिनी श्रीवास्तव ने मामले को देखने और जांच कराने की बात कही है। इन आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल उठता है कि इतने लंबे समय से कथित घटतौली पर विभागीय जिम्मेदारी क्या रही है। अब देखना होगा कि पूर्ति निरीक्षक इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और क्या कार्रवाई की जाती है।
बजहां में ग्राम चौपाल में राशन घटतौली का आरोप:ग्रामीणों ने कम राशन मिलने और आवाज दबाने की शिकायत की
सिद्धार्थनगर के बर्डपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बजहां के नरखोरिया में आयोजित ग्राम चौपाल में राशन वितरण प्रणाली में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्हें वर्षों से निर्धारित मात्रा से कम राशन मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी वे इस संबंध में विरोध करते हैं, तो उन पर दबाव बनाकर उनकी आवाज दबा दी जाती है। ग्रामीण रामू ने आरोप लगाया कि यह समस्या ‘बाप-दादाओं के जमाने से’ चली आ रही है और प्रभावशाली लोग शिकायतें शांत करा देते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, डर और दबाव के कारण कई लोग सच सामने लाने से कतराते हैं, जिसके परिणामस्वरूप राशन घटतौली जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। वहीं, कोटेदार रौवाब के नाती मोबीन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कम राशन मिलता है तो उसे तुरंत शिकायत करनी चाहिए, क्योंकि वितरण पूरी पारदर्शिता से किया जाता है। इस संबंध में पूर्ति निरीक्षक विंध्यवासिनी श्रीवास्तव ने मामले को देखने और जांच कराने की बात कही है। इन आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल उठता है कि इतने लंबे समय से कथित घटतौली पर विभागीय जिम्मेदारी क्या रही है। अब देखना होगा कि पूर्ति निरीक्षक इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और क्या कार्रवाई की जाती है।








































