दशकों पुराना ‘मच्छर काल’ लौटा: मिठौरा में शाम ढलते ही शुरू हो जाता है मच्छरों का तांडव

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रिपोर्ट:हेमंत कुमार दुबे।

मिठौरा (महराजगंज)। जनपद के मिठौरा खंड विकास क्षेत्र में इन दिनों मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थिति यह है कि दिन हो या रात, मच्छरों के हमले में कोई कमी नहीं आ रही। ग्रामीणों का कहना है कि मच्छरों का ऐसा आतंक दशकों पहले देखने को मिलता था, जो अब पुनः लौट आया है।


कानों में गूंजता ‘मौत का संगीत’, बीमारियों का बढ़ा डर।
क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में शाम होते ही मच्छरों का ‘संगीत’ शुरू हो जाता है। लोग मच्छरदानी, अगरबत्ती और अन्य जतन कर रहे हैं, लेकिन ये तमाम उपाय बेअसर साबित हो रहे हैं। मच्छरों के बढ़ते कुनबे ने स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में बुखार और संक्रमण जनित बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे लोग दहशत में हैं।


सफाई अभियानों पर भारी पड़ रहा मच्छरों का हमला।
हैरानी की बात यह है कि शासन-प्रशासन द्वारा समय-समय पर स्वच्छता अभियान चलाकर साफ-सफाई पर जोर दिया जाता है, इसके बावजूद मच्छरों के प्रजनन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जलजमाव और नालियों की समुचित सफाई न होना इस समस्या की मुख्य जड़ मानी जा रही है।
प्रशासनिक तैयारी: 1 अप्रैल से ‘आर-पार’ की जंग।*
इस गंभीर समस्या पर संज्ञान लेते हुए खंड विकास अधिकारी राहुल सागर ने बताया कि विभाग मच्छरों के उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा:
> “आगामी

आगामी 1 अप्रैल से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत पूरे ब्लॉक क्षेत्र में साफ-सफाई, फागिंग और एंटी-लार्वा दवाओं के छिड़काव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि लोगों को इस समस्या से स्थायी निजात मिल सके।”

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