महराजगंज जिले के बृजमनगंज थाना क्षेत्र के इनायतनगर में वन माफियाओं ने सहदवन के एक पूरे बगीचे को काट दिया है। यह बगीचा इनायतनगर चौराहे से कुछ ही दूरी पर स्थित था, जहां सैकड़ों पेड़ों की कटाई की गई। सूत्रों के अनुसार, लकड़ी माफियाओं ने सहदवन के बगीचे में केवल 25 पेड़ों की कटान का परमिट लिया था। दैनिक भास्कर की टीम ने 9 दिसंबर 2025 को मौके पर पहुंचकर सैकड़ों खड़े पेड़ों की वीडियो रिकॉर्डिंग की थी। चार दिन बाद, जब टीम दोबारा उसी स्थान पर पहुंची, तो पूरा बगीचा साफ हो चुका था। पेड़ों के अस्तित्व के कोई निशान नहीं बचे थे। लकड़ी माफियाओं ने पकड़े जाने से बचने के लिए अधिकतर पेड़ों की जड़ों को उखाड़ दिया या उन पर मिट्टी डालकर ढक दिया, ताकि कटान के प्रमाण न मिल सकें। यह पूरी घटना भास्कर के कैमरे में रिकॉर्ड है। इस मामले पर फरेंदा वन विभाग के डिप्टी रेंजर अरुण सिंह ने बताया कि पहले 25 पेड़ों की परमिट दी गई थी, और बाद में 20 और पेड़ों की परमिट की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि, यह सवाल उठता है कि जब परमिट केवल 25 पेड़ों की थी, तो 100 से अधिक पेड़ों की कटाई कैसे की गई? यदि नई परमिट की बात सही है, तो बिना अनुमति के पहले ही पेड़ों की कटान क्यों की गई? डिप्टी रेंजर ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
बृजमनगंज के इनायतनगर में पेड़ काटे गए: पूरे बगीचे के सफाया किया, जांच का आश्वासन मिला – Kolhui(Pharenda) News
महराजगंज जिले के बृजमनगंज थाना क्षेत्र के इनायतनगर में वन माफियाओं ने सहदवन के एक पूरे बगीचे को काट दिया है। यह बगीचा इनायतनगर चौराहे से कुछ ही दूरी पर स्थित था, जहां सैकड़ों पेड़ों की कटाई की गई। सूत्रों के अनुसार, लकड़ी माफियाओं ने सहदवन के बगीचे में केवल 25 पेड़ों की कटान का परमिट लिया था। दैनिक भास्कर की टीम ने 9 दिसंबर 2025 को मौके पर पहुंचकर सैकड़ों खड़े पेड़ों की वीडियो रिकॉर्डिंग की थी। चार दिन बाद, जब टीम दोबारा उसी स्थान पर पहुंची, तो पूरा बगीचा साफ हो चुका था। पेड़ों के अस्तित्व के कोई निशान नहीं बचे थे। लकड़ी माफियाओं ने पकड़े जाने से बचने के लिए अधिकतर पेड़ों की जड़ों को उखाड़ दिया या उन पर मिट्टी डालकर ढक दिया, ताकि कटान के प्रमाण न मिल सकें। यह पूरी घटना भास्कर के कैमरे में रिकॉर्ड है। इस मामले पर फरेंदा वन विभाग के डिप्टी रेंजर अरुण सिंह ने बताया कि पहले 25 पेड़ों की परमिट दी गई थी, और बाद में 20 और पेड़ों की परमिट की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि, यह सवाल उठता है कि जब परमिट केवल 25 पेड़ों की थी, तो 100 से अधिक पेड़ों की कटाई कैसे की गई? यदि नई परमिट की बात सही है, तो बिना अनुमति के पहले ही पेड़ों की कटान क्यों की गई? डिप्टी रेंजर ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।






































