डीएवी कॉलेज विवाद में बार एसोसिएशन उतरी मैदान में:शिक्षक-प्रबंधक विवाद में अधिवक्ताओं ने सौंपा ज्ञापन

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बलरामपुर के प्रतिष्ठित डीएवी इंटर कॉलेज में शिक्षक और कॉलेज प्रबंधक के बीच 13 जनवरी से चल रहा विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गया है।एक ओर शिक्षक ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है,वहीं दूसरी ओर जिला बार एसोसिएशन प्रबंधक के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। कॉलेज परिसर में हुए कथित हंगामे को लेकर जिला बार एसोसिएशन ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। अधिवक्ताओं ने अपर जिलाधिकारी (एडीएम)ज्योति राय और पुलिस अधीक्षक (एसपी)विकास कुमार को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पूरे प्रकरण को”सुनियोजित अराजकता”करार देते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की। बार एसोसिएशन का आरोप है कि शिक्षक अशोक तिवारी ने विद्यालय परिसर में अनुशासन को तार-तार कर दिया।अधिवक्ताओं के अनुसार, शिक्षक ने छात्रों को उकसाया,बाहरी असामाजिक तत्वों को बुलाकर नारेबाजी कराई और शैक्षणिक माहौल को पूरी तरह बिगाड़ दिया। मामला यहीं नहीं रुका,बल्कि छात्रों को भड़काकर बलरामपुर-तुलसीपुर मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कराया गया, जिससे आवागमन ठप हो गया और किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रही।वकीलों ने इसे नाबालिग छात्रों के भविष्य के साथ खतरनाक खिलवाड़ बताया है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कॉलेज प्रबंधक के खिलाफ बिना पुख्ता साक्ष्यों के मुकदमा दर्ज कराया गया है,जबकि संबंधित शिक्षक के अनुमोदन से जुड़ी फाइल पिछले करीब एक साल से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लंबित है। छात्रों को भड़काने की खुली छूट दी गई बार एसोसिएशन ने एक और सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उक्त शिक्षक के खिलाफ एससी/एसटी न्यायालय में दलित उत्पीड़न और बलात्कार का मामला पहले से विचाराधीन है,इसके बावजूद उन्हें छात्रों को भड़काने की खुली छूट दी गई। एसोसिएशन ने अपनी मांगों में बर्खास्त शिक्षक के अनुमोदन की प्रक्रिया तत्काल पूरी कराने,विद्यालय में उपद्रव फैलाने वाले शिक्षक समेत सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और शैक्षणिक संस्थानों को राजनीति व अराजकता का अड्डा बनने से रोकने की बात कही। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बहादुर सिंह,महामंत्री केजी श्रीवास्तव,हरिकांत मिश्र,अजय प्रताप सिंह‘मामा’, रामवली मिश्र,धर्मदेव मिश्र,अलीमुल हक,वीरेंद्र बहादुर श्रीवास्तव और राघवेंद्र कुमार शुक्ला सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल थे।
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