मुंडेरवा CHC के डॉक्टर आवास जर्जर:टूटे दरवाजे-खिड़कियां, सर्वे के बाद भी मरम्मत शुरू नहीं

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मुंडेरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए बने आवास अब रहने लायक नहीं बचे हैं। निर्माण के 16 साल के भीतर ही ये भवन जर्जर हो गए हैं, जिससे यहां कार्यरत चिकित्सकों को ठहरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एमओ आवास से लेकर कर्मचारी आवास तक की खिड़कियां और दरवाजे टूट चुके हैं। कमरों के अंदर कचरा फैला हुआ है। भवन की सीढ़ियां, कमरे, स्नानघर और शौचालय सभी खराब स्थिति में हैं। भूतल के आवासों के दरवाजे भी टूटकर गिर गए हैं, जिसके कारण डॉक्टर रात में यहां विश्राम नहीं कर पाते। इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण तत्कालीन स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एल.बी. प्रसाद की सहमति पर हुआ था। बस्ती की तत्कालीन जिलाधिकारी रोशन जैकब ने भूमि अधिग्रहण करवाकर वर्ष 2009 में इसका निर्माण पूरा करवाया था। वर्ष 2015 में अस्पताल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन में स्थानांतरित कर सेवाएं शुरू की गई थीं। हालांकि, निर्माण में मानकों और गुणवत्ता की कमी के कारण महज 16 वर्षों में ही ये आवास रहने लायक नहीं रहे। दैनिक भास्कर में 11 नवंबर को खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारी और एमओ भवन का सर्वे इंजीनियर भेजकर कराया था। सर्वे को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक मरम्मत का कोई काम शुरू नहीं हो सका है। भवन के जर्जर होने और मरम्मत के विषय में मुंडेरवा/बनकटी के प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इसकी जानकारी शासन को दी गई है। बजट मिलते ही कमियों को दूर करा दिया जाएगा।

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