महराजगंज के अहिरौली निवासी हफीजुर्रहमान ने गोरखपुर के एक निजी अस्पताल पर इलाज कराया। आरोप लगाया कि पथरी के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने बिना जानकारी और सहमति के उनकी दाहिनी किडनी निकाल दी। पीड़ित ने सीएमओ को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित के अनुसार 2022 में उनकी दाहिनी किडनी में 18 एमएम की पथरी पाई गई थी। इलाज के लिए उन्हें गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 21 अक्टूबर 2022 को ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हफीजुर्रहमान का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद से ही उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। रोज़गार के सिलसिले में वह विदेश चले गए। लेकिन वहां भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। बल्कि स्वास्थ्य और खराब होता गया। सितंबर 2025 में गंभीर अवस्था में भारत लौटने के बाद उन्होंने विभिन्न डायग्नोस्टिक सेंटरों में जांच कराई। रिपोर्ट देखकर वे स्तब्ध रह गए, क्योंकि जांच में उनकी दाहिनी किडनी मौजूद नहीं पाई गई। पीड़ित का कहना है कि डॉक्टरों ने पथरी का ऑपरेशन बताते हुए उनकी दाहिनी किडनी निकाल ली, जिसकी उन्हें न तो जानकारी दी गई और न ही किसी प्रकार की सहमति ली गई। मामले को लेकर उन्होंने 10 जनवरी 2026 को गोरखपुर के बड़हलगंज थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के निर्देश पर कराई गई एमआरआई जांच में भी दाहिनी किडनी न होने की पुष्टि हुई है। हफीजुर्रहमान का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक न तो पुलिस और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की गई है। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत की जांच के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
पथरी के ऑपरेशन के दौरान किडनी निकालने का आरोप: गोरखपुर के अस्पताल में चल रहा था इलाज, जांच की मांग – Maharajganj News
महराजगंज के अहिरौली निवासी हफीजुर्रहमान ने गोरखपुर के एक निजी अस्पताल पर इलाज कराया। आरोप लगाया कि पथरी के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने बिना जानकारी और सहमति के उनकी दाहिनी किडनी निकाल दी। पीड़ित ने सीएमओ को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित के अनुसार 2022 में उनकी दाहिनी किडनी में 18 एमएम की पथरी पाई गई थी। इलाज के लिए उन्हें गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 21 अक्टूबर 2022 को ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हफीजुर्रहमान का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद से ही उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। रोज़गार के सिलसिले में वह विदेश चले गए। लेकिन वहां भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। बल्कि स्वास्थ्य और खराब होता गया। सितंबर 2025 में गंभीर अवस्था में भारत लौटने के बाद उन्होंने विभिन्न डायग्नोस्टिक सेंटरों में जांच कराई। रिपोर्ट देखकर वे स्तब्ध रह गए, क्योंकि जांच में उनकी दाहिनी किडनी मौजूद नहीं पाई गई। पीड़ित का कहना है कि डॉक्टरों ने पथरी का ऑपरेशन बताते हुए उनकी दाहिनी किडनी निकाल ली, जिसकी उन्हें न तो जानकारी दी गई और न ही किसी प्रकार की सहमति ली गई। मामले को लेकर उन्होंने 10 जनवरी 2026 को गोरखपुर के बड़हलगंज थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के निर्देश पर कराई गई एमआरआई जांच में भी दाहिनी किडनी न होने की पुष्टि हुई है। हफीजुर्रहमान का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक न तो पुलिस और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की गई है। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत की जांच के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।









































