बहराइच में गुरुवार को थाना सुजौली क्षेत्र के बरखडिया बाजार में संचालित एक निजी अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया है। मरीज के इलाज में गंभीर लापरवाही के आरोपों के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मोतीपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. थानेदार ने मौके पर पहुंचकर यह कार्रवाई की। भवानीपुर गांव निवासी रमज़ाना ने बताया कि उन्होंने 11 जनवरी को अपनी बहू समीमुन निशा को बरखडिया बाजार स्थित भारत हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि चार दिनों तक इलाज के बावजूद मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ, बल्कि बुधवार को उसकी स्थिति और बिगड़ गई तथा उसका एक अंग सुन्न हो गया। परिजनों ने जब चिकित्सकों से मरीज की स्थिति के बारे में पूछताछ की, तो उन्हें किसी अन्य अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई। पीड़िता के अनुसार, इलाज के नाम पर उनसे 8200 रुपए लिए गए, लेकिन उपचार से कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद परिजनों ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. थानेदार और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) संजय कुमार से लिखित शिकायत की। सीएचसी अधीक्षक डॉ. थानेदार ने जानकारी दी कि सुजौली क्षेत्र में केवल तीन चिकित्सकों का ही पंजीकरण है। शिकायत मिला अस्पताल पंजीकृत नहीं पाया गया। प्रथम दृष्टया अनियमितताएं सामने आने पर अस्पताल को सील कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में संचालित अन्य संदिग्ध क्लीनिकों की भी जांच की जाएगी। वहीं, सीएमओ संजय कुमार ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में फर्जी चिकित्सकों और अवैध रूप से संचालित निजी क्लीनिकों पर शिकंजा कसने की उम्मीद जगी है।
बरखडिया में निजी अस्पताल सील: इलाज में लापरवाही के आरोप पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई – Mihinpurwa(Bahraich) News
बहराइच में गुरुवार को थाना सुजौली क्षेत्र के बरखडिया बाजार में संचालित एक निजी अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया है। मरीज के इलाज में गंभीर लापरवाही के आरोपों के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मोतीपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. थानेदार ने मौके पर पहुंचकर यह कार्रवाई की। भवानीपुर गांव निवासी रमज़ाना ने बताया कि उन्होंने 11 जनवरी को अपनी बहू समीमुन निशा को बरखडिया बाजार स्थित भारत हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि चार दिनों तक इलाज के बावजूद मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ, बल्कि बुधवार को उसकी स्थिति और बिगड़ गई तथा उसका एक अंग सुन्न हो गया। परिजनों ने जब चिकित्सकों से मरीज की स्थिति के बारे में पूछताछ की, तो उन्हें किसी अन्य अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई। पीड़िता के अनुसार, इलाज के नाम पर उनसे 8200 रुपए लिए गए, लेकिन उपचार से कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद परिजनों ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. थानेदार और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) संजय कुमार से लिखित शिकायत की। सीएचसी अधीक्षक डॉ. थानेदार ने जानकारी दी कि सुजौली क्षेत्र में केवल तीन चिकित्सकों का ही पंजीकरण है। शिकायत मिला अस्पताल पंजीकृत नहीं पाया गया। प्रथम दृष्टया अनियमितताएं सामने आने पर अस्पताल को सील कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में संचालित अन्य संदिग्ध क्लीनिकों की भी जांच की जाएगी। वहीं, सीएमओ संजय कुमार ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में फर्जी चिकित्सकों और अवैध रूप से संचालित निजी क्लीनिकों पर शिकंजा कसने की उम्मीद जगी है।





































