बहराइच जनपद में ईंट-भट्ठों पर कार्यरत प्रवासी और श्रमिक परिवारों के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण से जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का शुभारंभ चित्तौरा स्थित एसएएस ब्रिक फील्ड से हुआ। इस दौरान जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिंह की उपस्थिति में स्वास्थ्य कर्मियों ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मौके पर ही टीके लगाए। यह अभियान तीन चरणों में संचालित होगा, जिसका लक्ष्य 318 ईंट-भट्ठों पर रहने वाले लगभग 2500 बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कवर करना है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजय कुमार ने बताया कि प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चे अक्सर टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनमें 12 प्रकार की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ईंट-भट्ठों पर ही टीकाकरण सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। डॉ. कुमार ने ईंट-भट्ठा संचालकों से अपील की कि वे अभियान के दौरान स्वास्थ्य टीमों को पूरा सहयोग दें। उन्होंने उनसे अपने यहाँ काम करने वाले परिवारों के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर टीकाकरण के लिए प्रेरित करने का आग्रह भी किया। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिंह ने अभियान के चरणों का विवरण देते हुए बताया कि पहला चरण 16, 19 और 20 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। दूसरा चरण 16, 17, 19 और 20 फरवरी को होगा, जबकि तीसरा चरण 23, 24, 27 और 30 मार्च को संचालित किया जाएगा। यूनिसेफ़ के डीएमसी दिलीप मिश्रा ने जानकारी दी कि अभियान के दौरान स्वास्थ्य टीमें ईंट-भट्ठों पर जाकर बच्चों को निर्धारित टीके लगाएंगी। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं की एएनसी (एंटीनेटल केयर) जाँच और परामर्श भी प्रदान किया जाएगा। अभिभावकों को समय पर टीकाकरण कराने के लिए जागरूक भी किया जाएगा।
ईंट-भट्ठों पर टीकाकरण अभियान शुरू: बहराइच में तीन चरणों में 2500 से अधिक बच्चे-गर्भवती होंगी सुरक्षित – Bahraich News
बहराइच जनपद में ईंट-भट्ठों पर कार्यरत प्रवासी और श्रमिक परिवारों के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण से जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का शुभारंभ चित्तौरा स्थित एसएएस ब्रिक फील्ड से हुआ। इस दौरान जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिंह की उपस्थिति में स्वास्थ्य कर्मियों ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मौके पर ही टीके लगाए। यह अभियान तीन चरणों में संचालित होगा, जिसका लक्ष्य 318 ईंट-भट्ठों पर रहने वाले लगभग 2500 बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कवर करना है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजय कुमार ने बताया कि प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चे अक्सर टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनमें 12 प्रकार की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ईंट-भट्ठों पर ही टीकाकरण सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। डॉ. कुमार ने ईंट-भट्ठा संचालकों से अपील की कि वे अभियान के दौरान स्वास्थ्य टीमों को पूरा सहयोग दें। उन्होंने उनसे अपने यहाँ काम करने वाले परिवारों के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर टीकाकरण के लिए प्रेरित करने का आग्रह भी किया। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिंह ने अभियान के चरणों का विवरण देते हुए बताया कि पहला चरण 16, 19 और 20 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। दूसरा चरण 16, 17, 19 और 20 फरवरी को होगा, जबकि तीसरा चरण 23, 24, 27 और 30 मार्च को संचालित किया जाएगा। यूनिसेफ़ के डीएमसी दिलीप मिश्रा ने जानकारी दी कि अभियान के दौरान स्वास्थ्य टीमें ईंट-भट्ठों पर जाकर बच्चों को निर्धारित टीके लगाएंगी। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं की एएनसी (एंटीनेटल केयर) जाँच और परामर्श भी प्रदान किया जाएगा। अभिभावकों को समय पर टीकाकरण कराने के लिए जागरूक भी किया जाएगा।





































