बस्ती के दुर्गा नगर कटरा में नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। अयोध्या धाम से पधारे राष्ट्रीय कथावाचक मुक्तामणि शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब इसे हम अपने जीवन और व्यवहार में उतारें। अन्यथा यह केवल मनोरंजन मात्र बनकर रह जाएगी। उन्होंने बताया कि कथा से मन का शुद्धिकरण होता है, संशय दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है, जिससे जीवन सुगम हो जाता है। शास्त्री ने ‘अभियान’ और ‘लीला’ के बीच का अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि अभियान वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति को कर्तव्य का अभिमान होता है या सुखी रहने की इच्छा होती है। इसके विपरीत, दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को ‘लीला’ कहते हैं। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रोताओं को वात्सल्य रस से सराबोर कर दिया। उन्होंने पूतना वध का प्रसंग सुनाया, जिसमें श्रीकृष्ण ने विष पिलाने वाली पूतना को भी माता का स्थान दिया। इसी प्रकार, कार्तिक माह में जब ब्रजवासी इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए पूजन की तैयारी कर रहे थे, तब भगवान कृष्ण ने उन्हें इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इंद्र देव के क्रोधित होकर गोकुल में भारी वर्षा करने पर, भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक प्रमोद पांडेय, चेयरमैन प्रतिनिधि अंकुर वर्मा, राजन पांडेय, हरैया विधायक प्रतिनिधि सरोज मिश्रा, एडवोकेट फूलचंद्र पांडेय, शैलेंद्र दुबे, विनोद शुक्ला, सभासद परमेश्वर शुक्ला पप्पू, विपुल पांडेय, संतोष गुप्ता, सूर्य प्रकाश शुक्ला, केडी पांडेय और अनिल श्रीवास्तव सहित कई भक्तगण उपस्थित रहे।






































