
बहराइच में रिश्वतखोरी के आरोप में मटेरा थाना प्रभारी, एक उपनिरीक्षक और एक सिपाही को निलंबित कर दिया गया है। देवीपाटन मंडल के आईजी की जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। पीड़ित ने आईजी द्वारा जारी हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। यह मामला पश्चिम बंगाल से एक युवती को लेकर भागे युवक से जुड़ा है। मटेरा थाना क्षेत्र के सिखनपुरवा गांव का गजेंद्र सिंह पश्चिम बंगाल में काम करता था, जहां उसकी 24 नॉर्थ परगना जिले की एक युवती से दोस्ती हुई। यह दोस्ती प्यार में बदल गई और तीन महीने पहले दोनों बहराइच आकर गजेंद्र के रिश्तेदार मुनिजर सिंह के यहां रहने लगे थे। युवती के परिजनों ने गजेंद्र सिंह के खिलाफ पश्चिम बंगाल में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद, बंगाल पुलिस युवक-युवती की तलाश में बहराइच पहुंची। मटेरा थाना प्रभारी सुरेंद्र, उपनिरीक्षक विशाल जायसवाल और आरक्षी अवधेश यादव ने बंगाल पुलिस के साथ मिलकर दबिश दी। उन्होंने युवक, युवती और उनके रिश्तेदार मुनिजर सिंह को हिरासत में लिया। बाद में बंगाल पुलिस युवक-युवती को अपने साथ ले गई। रिश्तेदार मुनिजर सिंह ने आरोप लगाया कि उसे छोड़ने के लिए थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक और आरक्षी ने एक लाख रुपये की रिश्वत ली थी। मुनिजर सिंह ने आईजी अमित पाठक द्वारा रिश्वतखोरी के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर 8467919487 पर इसकी शिकायत दर्ज कराई। आईजी अमित पाठक द्वारा कराई गई जांच में मुनिजर सिंह के आरोप सही पाए गए। जांच के बाद, आईजी ने संबंधित पुलिसकर्मियों को फटकार लगाई, जिसके बाद उन्होंने मुनिजर सिंह को रिश्वत के पैसे वापस कर दिए। आईजी अमित पाठक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के बाद, शुक्रवार को मटेरा थाना प्रभारी सुरेंद्र, उपनिरीक्षक विशाल जायसवाल और आरक्षी अवधेश यादव को निलंबित कर दिया गया।





































