तुलसीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत नवानगर में स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत सामने आई है। यहां ग्रामीणों की सुविधा के लिए लाखों रुपये की लागत से दो वर्ष पूर्व निर्मित सामुदायिक शौचालय एवं स्नान घर आज तक उपयोग में नहीं आ सका है। भवन तैयार होने के बाद से ही इसमें ताला लगा हुआ है, जिससे ग्रामीण इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय बनने के बाद से उसका ताला कभी नहीं खुला। इस मजबूरी के कारण ग्रामीणों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि स्वच्छता के सरकारी दावों पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि भवन के भीतर देखने पर फर्श और अन्य संरचनाएं भी क्षतिग्रस्त होती दिख रही हैं, जिससे यह सार्वजनिक संपत्ति समय के साथ जर्जर हो सकती है। ग्रामीण सूरज, उमेश, दीपक और करिया ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत को दिए गए धन का सही उपयोग नहीं हो रहा है। केवल भवन खड़ा कर उसे बंद रखना जनहित में नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह स्थिति केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन की मूल भावना के विपरीत है। मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त करना, स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सार्वजनिक शौचालयों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना है। यदि नवानगर में बना यह सामुदायिक शौचालय बंद पड़ा रहेगा, तो ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) गांव का लक्ष्य कैसे पूरा होगा, यह एक बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और पंचायत प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शौचालय का ताला खुलवाया जाए और उसके नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
तुलसीपुर में सामुदायिक शौचालय पर ताला:दो साल से बंद, स्वच्छता मिशन की मंशा पर उठे सवाल
तुलसीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत नवानगर में स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत सामने आई है। यहां ग्रामीणों की सुविधा के लिए लाखों रुपये की लागत से दो वर्ष पूर्व निर्मित सामुदायिक शौचालय एवं स्नान घर आज तक उपयोग में नहीं आ सका है। भवन तैयार होने के बाद से ही इसमें ताला लगा हुआ है, जिससे ग्रामीण इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय बनने के बाद से उसका ताला कभी नहीं खुला। इस मजबूरी के कारण ग्रामीणों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि स्वच्छता के सरकारी दावों पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि भवन के भीतर देखने पर फर्श और अन्य संरचनाएं भी क्षतिग्रस्त होती दिख रही हैं, जिससे यह सार्वजनिक संपत्ति समय के साथ जर्जर हो सकती है। ग्रामीण सूरज, उमेश, दीपक और करिया ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत को दिए गए धन का सही उपयोग नहीं हो रहा है। केवल भवन खड़ा कर उसे बंद रखना जनहित में नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह स्थिति केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन की मूल भावना के विपरीत है। मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त करना, स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सार्वजनिक शौचालयों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना है। यदि नवानगर में बना यह सामुदायिक शौचालय बंद पड़ा रहेगा, तो ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) गांव का लक्ष्य कैसे पूरा होगा, यह एक बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और पंचायत प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शौचालय का ताला खुलवाया जाए और उसके नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।






































