मौनी अमावस्या के अवसर पर भारत-नेपाल सीमा पर स्थित त्रिवेणी धाम में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। माघ मेले के दौरान तड़के सुबह से ही भारत और नेपाल दोनों देशों से हजारों श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करने पहुंचे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण भारतीय सीमा क्षेत्र में सैकड़ों वाहन कतारबद्ध देखे गए। सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की कड़ी निगरानी में वाहनों को क्रमबद्ध तरीके से नेपाल की ओर भेजा गया। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकना था। एसएसबी के जवान लगातार यातायात और भीड़ नियंत्रण में सक्रिय रहे। सुबह 7 बजे तक लगभग 500 वाहन सीमा पार कर चुके थे, जबकि सैकड़ों अन्य वाहन अभी भी सीमा पर कतार में खड़े थे। वाहनों की यह कतार नेपाल से भारत तक करीब एक किलोमीटर लंबी थी। इसी बीच, सीमा क्षेत्र ठूठीबारी में सामाजिक संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के लिए सेवा कार्य किए। इन संस्थाओं ने स्नान करने जा रहे श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था की, जिसमें गर्म चाय, बिस्कुट और प्रसाद शामिल था। श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना की। सेवा कार्य में लगे टीम सदस्यों ने बताया कि मानव सेवा उनकी संस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी ऐसे धार्मिक व सामाजिक आयोजनों में सेवा कार्य जारी रहेगा। प्रशासन, सुरक्षा बल और सामाजिक संस्थाओं के आपसी समन्वय से यह मेला शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
त्रिवेणी धाम में मौनी अमावस्या पर उमड़ा जनसैलाब: महराजगंज में एसएसबी की कड़ी निगरानी में व्यवस्थित निकासी, भीड़ नियंत्रण में सक्रिय जवान – Laxmipur Khurd(Nichlaul) News
मौनी अमावस्या के अवसर पर भारत-नेपाल सीमा पर स्थित त्रिवेणी धाम में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। माघ मेले के दौरान तड़के सुबह से ही भारत और नेपाल दोनों देशों से हजारों श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करने पहुंचे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण भारतीय सीमा क्षेत्र में सैकड़ों वाहन कतारबद्ध देखे गए। सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की कड़ी निगरानी में वाहनों को क्रमबद्ध तरीके से नेपाल की ओर भेजा गया। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकना था। एसएसबी के जवान लगातार यातायात और भीड़ नियंत्रण में सक्रिय रहे। सुबह 7 बजे तक लगभग 500 वाहन सीमा पार कर चुके थे, जबकि सैकड़ों अन्य वाहन अभी भी सीमा पर कतार में खड़े थे। वाहनों की यह कतार नेपाल से भारत तक करीब एक किलोमीटर लंबी थी। इसी बीच, सीमा क्षेत्र ठूठीबारी में सामाजिक संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के लिए सेवा कार्य किए। इन संस्थाओं ने स्नान करने जा रहे श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था की, जिसमें गर्म चाय, बिस्कुट और प्रसाद शामिल था। श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना की। सेवा कार्य में लगे टीम सदस्यों ने बताया कि मानव सेवा उनकी संस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी ऐसे धार्मिक व सामाजिक आयोजनों में सेवा कार्य जारी रहेगा। प्रशासन, सुरक्षा बल और सामाजिक संस्थाओं के आपसी समन्वय से यह मेला शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।






































