महराजगंज। जिला बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। पहले से ही फर्जी नियुक्तियों और कार्यप्रणाली में गड़बड़ियों के कारण आलोचना झेल रहे इस विभाग पर अब गोपनीयता भंग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि कार्यालय में तैनात वरिष्ठ बाबू अपने काम को आसान बनाने के लिए निजी तौर पर लोगों को 5 से 10 हजार रुपये मासिक पर रखकर कंप्यूटर संचालन करवा रहे हैं। इन बाहरी व्यक्तियों से विभाग की संवेदनशील फाइलों से लेकर अधिकारियों के डोंगल तक का काम कराया जा रहा है, जिससे विभागीय दस्तावेजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। कार्यालय के महत्वपूर्ण पटलों पर इन कथित निजी कर्मचारियों का दबदबा साफ दिखाई देता है। बाबू खुद केवल निगरानी करते हैं, जबकि असली काम उनके निजी कर्मचारी ही करते हैं। अधिकारियों को इस व्यवस्था की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे मिलीभगत का संदेह गहराता जा रहा है। गौरतलब है कि विभाग के कई बाबुओं पर पहले भी फर्जी नियुक्तियों और अन्य अनियमितताओं के मामले में जांच बैठाई गई थी, लेकिन हर बार नतीजा शून्य ही रहा। कार्रवाई न होने से बाबुओं के हौसले बुलंद हैं और वे नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग पहले से ही फर्जी नियुक्तियों और अनियमितताओं के कारण आलोचना का शिकार रहा है। अब गोपनीयता भंग होने की इन खबरों ने विभाग की साख को और धूमिल कर दिया है। शिक्षा व्यवस्था संभालने वाले इस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धि पांडेय से उनका पक्ष जानने के लिए भास्कर एप टीम ने उनके मोबाइल पर लगातार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं उठा। इसके बाद टीम उनसे मिलने उनके कार्यालय पहुंची, जहां भी मैडम अनुपस्थित मिलीं।
बेसिक शिक्षा विभाग पर गोपनीयता भंग के आरोप: निजी लोग संभाल रहे संवेदनशील फाइलें और अधिकारियों के डोंगल – Maharajganj News
महराजगंज। जिला बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। पहले से ही फर्जी नियुक्तियों और कार्यप्रणाली में गड़बड़ियों के कारण आलोचना झेल रहे इस विभाग पर अब गोपनीयता भंग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि कार्यालय में तैनात वरिष्ठ बाबू अपने काम को आसान बनाने के लिए निजी तौर पर लोगों को 5 से 10 हजार रुपये मासिक पर रखकर कंप्यूटर संचालन करवा रहे हैं। इन बाहरी व्यक्तियों से विभाग की संवेदनशील फाइलों से लेकर अधिकारियों के डोंगल तक का काम कराया जा रहा है, जिससे विभागीय दस्तावेजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। कार्यालय के महत्वपूर्ण पटलों पर इन कथित निजी कर्मचारियों का दबदबा साफ दिखाई देता है। बाबू खुद केवल निगरानी करते हैं, जबकि असली काम उनके निजी कर्मचारी ही करते हैं। अधिकारियों को इस व्यवस्था की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे मिलीभगत का संदेह गहराता जा रहा है। गौरतलब है कि विभाग के कई बाबुओं पर पहले भी फर्जी नियुक्तियों और अन्य अनियमितताओं के मामले में जांच बैठाई गई थी, लेकिन हर बार नतीजा शून्य ही रहा। कार्रवाई न होने से बाबुओं के हौसले बुलंद हैं और वे नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग पहले से ही फर्जी नियुक्तियों और अनियमितताओं के कारण आलोचना का शिकार रहा है। अब गोपनीयता भंग होने की इन खबरों ने विभाग की साख को और धूमिल कर दिया है। शिक्षा व्यवस्था संभालने वाले इस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धि पांडेय से उनका पक्ष जानने के लिए भास्कर एप टीम ने उनके मोबाइल पर लगातार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं उठा। इसके बाद टीम उनसे मिलने उनके कार्यालय पहुंची, जहां भी मैडम अनुपस्थित मिलीं।




































