निचलौल ब्लॉक क्षेत्र के राजकीय रेशम फार्म श्रीनगर और मिठौरा ब्लॉक के हरिहरपुर में मंगलवार से शहतूती रेशम उत्पादन के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत चयनित 90 किसानों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिकों द्वारा दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का शुभारंभ रेशम विभाग ने किया। सहायक निदेशक रेशम गोरखपुर डॉ. एस.बी. सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत 43 किसानों को राजकीय रेशम फार्म हरिहरपुर में और 47 किसानों को राजकीय रेशम फार्म श्रीनगर में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हरिहरपुर में केंद्रीय रेशम बोर्ड के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डी.एन. सिंह प्रशिक्षण दे रहे हैं, जबकि श्रीनगर में सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक जटाशंकर कीटपालन का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। प्रशिक्षण में किसानों को शहतूत की खेती, रेशम कीट पालन, चाकी पालन, कोकून उत्पादन और धागाकरण की आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। डॉ. सिंह ने बताया कि रेशम कीटपालन रोजगार का एक अच्छा माध्यम है, जिससे किसान आर्थिक लाभ प्राप्त कर अपनी पारिवारिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इस अवसर पर सहायक रेशम विकास अधिकारी मनोज कुमार मिश्र, रामआसरे प्रजापति, गोरख गुप्ता, समीर गुप्ता, जयप्रकाश, अहमद अली, रामबचन, शशिमहल सहित कई अधिकारी और किसान मौजूद रहे।
निचलौल में 90 किसानों को रेशम उत्पादन प्रशिक्षण: राजकीय रेशम फार्म ने पांच दिवसीय कार्यक्रम शुरू किया – Bahuar(Nichlaul) News
निचलौल ब्लॉक क्षेत्र के राजकीय रेशम फार्म श्रीनगर और मिठौरा ब्लॉक के हरिहरपुर में मंगलवार से शहतूती रेशम उत्पादन के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत चयनित 90 किसानों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिकों द्वारा दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का शुभारंभ रेशम विभाग ने किया। सहायक निदेशक रेशम गोरखपुर डॉ. एस.बी. सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत 43 किसानों को राजकीय रेशम फार्म हरिहरपुर में और 47 किसानों को राजकीय रेशम फार्म श्रीनगर में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हरिहरपुर में केंद्रीय रेशम बोर्ड के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डी.एन. सिंह प्रशिक्षण दे रहे हैं, जबकि श्रीनगर में सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक जटाशंकर कीटपालन का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। प्रशिक्षण में किसानों को शहतूत की खेती, रेशम कीट पालन, चाकी पालन, कोकून उत्पादन और धागाकरण की आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। डॉ. सिंह ने बताया कि रेशम कीटपालन रोजगार का एक अच्छा माध्यम है, जिससे किसान आर्थिक लाभ प्राप्त कर अपनी पारिवारिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इस अवसर पर सहायक रेशम विकास अधिकारी मनोज कुमार मिश्र, रामआसरे प्रजापति, गोरख गुप्ता, समीर गुप्ता, जयप्रकाश, अहमद अली, रामबचन, शशिमहल सहित कई अधिकारी और किसान मौजूद रहे।






































