गेहूं के सीजन के बीच डोकम बलुआ माइनर नहर सूखी पड़ी है, जिससे किसानों को सिंचाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नहर में पानी का संचार नहीं हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब से यह नहर बनी है, तब से लेकर आज तक लगभग 30 वर्षों से इसके अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा है। सरकार हर साल इस नहर की साफ-सफाई पर लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। किसानों ने बताया कि चकबंदी में उनकी काफी जमीन निकल गई, लेकिन उन्हें इस नहर से सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाया। कई किसानों का कहना है कि वे कई वर्षों से खेती कर रहे हैं, पर नहर का पानी उन्हें कभी नहीं मिला। किसान प्रकाश यादव ने बताया कि वह लगभग 20 वर्षों से खेती कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है। किसान राजकुमार का कहना है कि सरकार हर वर्ष सफाई के नाम पर लाखों रुपये निकाला जाता है, लेकिन डोकम से बलुआ तक लगभग 5 से 6 गांवों के किसानों को नहर से पानी नहीं मिल पाता। किसान रामपाल मिश्रा ने भी बताया कि नहर हमेशा सूखी रहती है और आज तक इसमें पानी नहीं आया। किसान ज्ञान दास ने जानकारी दी कि वे मजबूरी में बोरिंग से पानी निकालकर सिंचाई करते हैं, क्योंकि नहर में पानी उपलब्ध नहीं है। सतीश मिश्रा ने बताया कि नहर विभाग को इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस नहर से चोरथरी, खुखड़ी, बलुआ, मल्हवार और सोनबरसा सहित कई गांव जुड़े हुए हैं, जो पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
डोकम बलुआ माइनर नहर सूखी:सफाई पर लाखों लाख खर्च, लग भग 30 बषो से नहीं मिला पानी
गेहूं के सीजन के बीच डोकम बलुआ माइनर नहर सूखी पड़ी है, जिससे किसानों को सिंचाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नहर में पानी का संचार नहीं हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब से यह नहर बनी है, तब से लेकर आज तक लगभग 30 वर्षों से इसके अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा है। सरकार हर साल इस नहर की साफ-सफाई पर लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। किसानों ने बताया कि चकबंदी में उनकी काफी जमीन निकल गई, लेकिन उन्हें इस नहर से सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाया। कई किसानों का कहना है कि वे कई वर्षों से खेती कर रहे हैं, पर नहर का पानी उन्हें कभी नहीं मिला। किसान प्रकाश यादव ने बताया कि वह लगभग 20 वर्षों से खेती कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है। किसान राजकुमार का कहना है कि सरकार हर वर्ष सफाई के नाम पर लाखों रुपये निकाला जाता है, लेकिन डोकम से बलुआ तक लगभग 5 से 6 गांवों के किसानों को नहर से पानी नहीं मिल पाता। किसान रामपाल मिश्रा ने भी बताया कि नहर हमेशा सूखी रहती है और आज तक इसमें पानी नहीं आया। किसान ज्ञान दास ने जानकारी दी कि वे मजबूरी में बोरिंग से पानी निकालकर सिंचाई करते हैं, क्योंकि नहर में पानी उपलब्ध नहीं है। सतीश मिश्रा ने बताया कि नहर विभाग को इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस नहर से चोरथरी, खुखड़ी, बलुआ, मल्हवार और सोनबरसा सहित कई गांव जुड़े हुए हैं, जो पानी की कमी से जूझ रहे हैं।






































