बुधवार सुबह बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र मे घने कोहरे की चपेट में रहा। कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो गई, जिससे यातायात धीमी गति से चला। ठंडी हवाओं के कारण मौसम में ठिठुरन बढ़ गई। बढ़ती ठंड का असर लोगों की दिनचर्या पर भी दिख रहा है। सुबह की सैर पर निकलने वालों की संख्या में कमी आई है। लोग गर्म कपड़े पहनकर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। चौराहों और गलियों में चाय तथा गर्म पेय पदार्थों की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों में भी सुबह घना कोहरा छाया रहा। सूर्य काफी देर तक बादलों और धुंध के पीछे छिपा रहा। मौसम विभाग के अनुसार, सुबह का तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया, जिससे ठंड का असर महसूस हुआ। सुबह लगभग 11 बजे हल्की धूप निकली। बुधवार सुबह जनवरी जैसी ठंड महसूस की गई, जिससे रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हुए। खेती पर भी इसका असर पड़ा है। अक्टूबर के अंत में आए चक्रवाती तूफान के कारण हुई बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ था, जिससे धान की कटाई प्रभावित हुई। इसके अलावा, सरसों, आलू, मटर और अन्य सब्जियों की फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। गेहूं की बुवाई में देरी होने की आशंका है, और जो सरसों व आलू की फसलें बोई जा चुकी हैं, उनके भी प्रभावित होने का अंदेशा है।
बढ़नी में घना कोहरा, तापमान में गिरावट दर्ज:दृश्यता कम होने से जनजीवन और यातायात हुआ प्रभावित
बुधवार सुबह बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र मे घने कोहरे की चपेट में रहा। कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो गई, जिससे यातायात धीमी गति से चला। ठंडी हवाओं के कारण मौसम में ठिठुरन बढ़ गई। बढ़ती ठंड का असर लोगों की दिनचर्या पर भी दिख रहा है। सुबह की सैर पर निकलने वालों की संख्या में कमी आई है। लोग गर्म कपड़े पहनकर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। चौराहों और गलियों में चाय तथा गर्म पेय पदार्थों की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों में भी सुबह घना कोहरा छाया रहा। सूर्य काफी देर तक बादलों और धुंध के पीछे छिपा रहा। मौसम विभाग के अनुसार, सुबह का तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया, जिससे ठंड का असर महसूस हुआ। सुबह लगभग 11 बजे हल्की धूप निकली। बुधवार सुबह जनवरी जैसी ठंड महसूस की गई, जिससे रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हुए। खेती पर भी इसका असर पड़ा है। अक्टूबर के अंत में आए चक्रवाती तूफान के कारण हुई बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ था, जिससे धान की कटाई प्रभावित हुई। इसके अलावा, सरसों, आलू, मटर और अन्य सब्जियों की फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। गेहूं की बुवाई में देरी होने की आशंका है, और जो सरसों व आलू की फसलें बोई जा चुकी हैं, उनके भी प्रभावित होने का अंदेशा है।









































