निचलौल थाना क्षेत्र के भारत-नेपाल सीमा से सटे बैठवलिया गांव स्थित दुर्गा मंदिर ब्रह्मस्थान पर आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ का बुधवार को समापन हो गया। अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। दूर-दराज से आए भक्तों ने मां दुर्गा की आराधना कर आशीर्वाद लिया और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। पूरे गांव में भक्तिमय और आस्थापूर्ण माहौल रहा। यज्ञ मंडप में विद्वान पंडित बृजेश त्रिपाठी और उनके सहयोगी पंडितों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना, हवन और मां भगवती की आरती संपन्न कराई। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर अपने परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। महायज्ञ के समापन के अवसर पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे की व्यवस्था यज्ञ समिति के सदस्यों और गांव के युवाओं ने मिलकर संभाली। श्रद्धालुओं के लिए बैठकर प्रसाद ग्रहण करने की विशेष व्यवस्था की गई थी, जिसकी भक्तों ने सराहना की। महायज्ञ के अध्यक्ष प्रेमलाल मद्धेशिया और मोहनलाल मद्धेशिया ने बताया कि यह आयोजन गांव की धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी के सहयोग से महायज्ञ के शांतिपूर्ण और सफल समापन पर संतोष व्यक्त किया। मंदिर के पुजारी मधुसूदन पांडेय ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में भाईचारा, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। नौ दिनों तक चले इस महायज्ञ में प्रतिदिन कथा, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में यज्ञ समिति के सदस्यों, ग्रामीणों और युवाओं का विशेष योगदान रहा। स्थानीय लोगों ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
बैठवलिया में शतचंडी महायज्ञ: श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, देर रात तक चला प्रसाद वितरण – Bahuar(Nichlaul) News
निचलौल थाना क्षेत्र के भारत-नेपाल सीमा से सटे बैठवलिया गांव स्थित दुर्गा मंदिर ब्रह्मस्थान पर आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ का बुधवार को समापन हो गया। अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। दूर-दराज से आए भक्तों ने मां दुर्गा की आराधना कर आशीर्वाद लिया और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। पूरे गांव में भक्तिमय और आस्थापूर्ण माहौल रहा। यज्ञ मंडप में विद्वान पंडित बृजेश त्रिपाठी और उनके सहयोगी पंडितों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना, हवन और मां भगवती की आरती संपन्न कराई। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर अपने परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। महायज्ञ के समापन के अवसर पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे की व्यवस्था यज्ञ समिति के सदस्यों और गांव के युवाओं ने मिलकर संभाली। श्रद्धालुओं के लिए बैठकर प्रसाद ग्रहण करने की विशेष व्यवस्था की गई थी, जिसकी भक्तों ने सराहना की। महायज्ञ के अध्यक्ष प्रेमलाल मद्धेशिया और मोहनलाल मद्धेशिया ने बताया कि यह आयोजन गांव की धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी के सहयोग से महायज्ञ के शांतिपूर्ण और सफल समापन पर संतोष व्यक्त किया। मंदिर के पुजारी मधुसूदन पांडेय ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में भाईचारा, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। नौ दिनों तक चले इस महायज्ञ में प्रतिदिन कथा, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में यज्ञ समिति के सदस्यों, ग्रामीणों और युवाओं का विशेष योगदान रहा। स्थानीय लोगों ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में भी सक्रिय भूमिका निभाई।





































