महराजगंज के निचलौल ब्लॉक की भेड़िया ग्राम पंचायत में एक नए वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। मनरेगा योजना के तहत पहले से हुए मिट्टी समतलीकरण कार्य के लिए दोबारा भुगतान किया गया है, जिसने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अभिलेखों के अनुसार, भेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत पार्क के समतलीकरण और मिट्टी कार्य पर कुल 5.28 लाख रुपये खर्च किए गए थे। यह कार्य नियमानुसार पूर्ण हुआ और इसका भुगतान 30 अगस्त 2024 को किया गया था। इस कार्य में किसी अनियमितता की बात सामने नहीं आई थी। मनरेगा के अंतर्गत मिट्टी का कार्य पूरा होने के बाद पार्क में इंटरलॉकिंग का कार्य भी कराया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मिट्टी से संबंधित सभी आवश्यक कार्य पहले ही पूरे हो चुके थे। हालांकि, इसके बावजूद 15 अक्टूबर 2024 को उसी मनरेगा पार्क में ‘मिट्टी कार्य’ के नाम पर 14वें वित्त आयोग की धनराशि से 1,34,272 रुपये का भुगतान किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह भुगतान किसी पंजीकृत फर्म या आपूर्तिकर्ता को न देकर सीधे प्रद्युम्न धर दुबे नामक व्यक्ति के निजी खाते में किया गया। इस भुगतान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस प्रकरण में दो अहम सवाल सामने आ रहे हैं। पहला, जब मनरेगा योजना से पार्क में मिट्टी और समतलीकरण का कार्य पहले ही पूरा हो चुका था, तो ग्राम पंचायत निधि से दोबारा मिट्टी डालने की आवश्यकता क्यों पड़ी? दूसरा, यदि वास्तव में कोई अतिरिक्त कार्य कराया गया था, तो उसका भुगतान नियमों के अनुसार किसी फर्म को न कर एक व्यक्ति के निजी खाते में क्यों किया गया? ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत निधि से व्यक्तिगत खाते में इस तरह का भुगतान नियमों के विरुद्ध है और इससे भुगतान की मंशा पर संदेह उत्पन्न होता है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भेड़िया ग्राम पंचायत में पूर्व में बिना स्वीकृति किए गए भुगतानों को लेकर विभागीय जांच पहले से ही लंबित है। वहीं, छोटे मामलों में सचिवों के त्वरित निलंबन की मिसालें मौजूद होने के बावजूद लाखों रुपये के इस भुगतान पर ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि पंचायत विभाग इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
भेड़िया पंचायत- मिट्टी कार्य के 1.34 लाख सीधे खाते में।: मनरेगा पार्क के लिए दोबारा भुगतान पर उठे गंभीर प्रश्न – Maharajganj News
महराजगंज के निचलौल ब्लॉक की भेड़िया ग्राम पंचायत में एक नए वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। मनरेगा योजना के तहत पहले से हुए मिट्टी समतलीकरण कार्य के लिए दोबारा भुगतान किया गया है, जिसने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अभिलेखों के अनुसार, भेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत पार्क के समतलीकरण और मिट्टी कार्य पर कुल 5.28 लाख रुपये खर्च किए गए थे। यह कार्य नियमानुसार पूर्ण हुआ और इसका भुगतान 30 अगस्त 2024 को किया गया था। इस कार्य में किसी अनियमितता की बात सामने नहीं आई थी। मनरेगा के अंतर्गत मिट्टी का कार्य पूरा होने के बाद पार्क में इंटरलॉकिंग का कार्य भी कराया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मिट्टी से संबंधित सभी आवश्यक कार्य पहले ही पूरे हो चुके थे। हालांकि, इसके बावजूद 15 अक्टूबर 2024 को उसी मनरेगा पार्क में ‘मिट्टी कार्य’ के नाम पर 14वें वित्त आयोग की धनराशि से 1,34,272 रुपये का भुगतान किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह भुगतान किसी पंजीकृत फर्म या आपूर्तिकर्ता को न देकर सीधे प्रद्युम्न धर दुबे नामक व्यक्ति के निजी खाते में किया गया। इस भुगतान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस प्रकरण में दो अहम सवाल सामने आ रहे हैं। पहला, जब मनरेगा योजना से पार्क में मिट्टी और समतलीकरण का कार्य पहले ही पूरा हो चुका था, तो ग्राम पंचायत निधि से दोबारा मिट्टी डालने की आवश्यकता क्यों पड़ी? दूसरा, यदि वास्तव में कोई अतिरिक्त कार्य कराया गया था, तो उसका भुगतान नियमों के अनुसार किसी फर्म को न कर एक व्यक्ति के निजी खाते में क्यों किया गया? ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत निधि से व्यक्तिगत खाते में इस तरह का भुगतान नियमों के विरुद्ध है और इससे भुगतान की मंशा पर संदेह उत्पन्न होता है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भेड़िया ग्राम पंचायत में पूर्व में बिना स्वीकृति किए गए भुगतानों को लेकर विभागीय जांच पहले से ही लंबित है। वहीं, छोटे मामलों में सचिवों के त्वरित निलंबन की मिसालें मौजूद होने के बावजूद लाखों रुपये के इस भुगतान पर ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि पंचायत विभाग इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।









































