विशेश्वरगंज, कंछर विकास क्षेत्र में पशुपालकों के लिए स्थापित विशेश्वरगंज पशु चिकित्सालय 53 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। 30 अगस्त 1972 को निर्मित यह चिकित्सालय आज बदहाली का शिकार है, जिससे पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल परिसर में डॉक्टर आवास, स्टोर और शौचालय जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं अब तक उपलब्ध नहीं हैं। पशुओं के उपचार के लिए लगा अड़गड़ा भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे इलाज में कठिनाई आती है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में पशुओं की बेहतर सेवा के लिए स्थापित दो पशु सेवा केंद्र भी बदहाल स्थिति में हैं। डोलकुआं और लक्खारामपुर स्थित इन केंद्रों की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं और यहां कोई कर्मचारी भी तैनात नहीं है। इन केंद्रों की बदहाली के कारण पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने से पशुओं की हालत गंभीर हो जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से पशु चिकित्सालय और पशु सेवा केंद्रों की दशा सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
विशेश्वरगंज पशु अस्पताल 53 साल बाद भी सुविधाओं से वंचित: डॉक्टर आवास, स्टोर और शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं नदारद – Kanchhar(Payagpur) News
विशेश्वरगंज, कंछर विकास क्षेत्र में पशुपालकों के लिए स्थापित विशेश्वरगंज पशु चिकित्सालय 53 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। 30 अगस्त 1972 को निर्मित यह चिकित्सालय आज बदहाली का शिकार है, जिससे पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल परिसर में डॉक्टर आवास, स्टोर और शौचालय जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं अब तक उपलब्ध नहीं हैं। पशुओं के उपचार के लिए लगा अड़गड़ा भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे इलाज में कठिनाई आती है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में पशुओं की बेहतर सेवा के लिए स्थापित दो पशु सेवा केंद्र भी बदहाल स्थिति में हैं। डोलकुआं और लक्खारामपुर स्थित इन केंद्रों की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं और यहां कोई कर्मचारी भी तैनात नहीं है। इन केंद्रों की बदहाली के कारण पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने से पशुओं की हालत गंभीर हो जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से पशु चिकित्सालय और पशु सेवा केंद्रों की दशा सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।







































