डुमरियागंज विकास खंड के जमौता गांव में डॉ. अंबेडकर सामुदायिक केंद्र जर्जर हालत में है। वर्ष 2009-10 में 14 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस केंद्र पर ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इसका उपयोग कृषि उपज के भंडारण के लिए किया जा रहा है, जिससे केंद्र का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। यह सामुदायिक केंद्र तब बनाया गया था जब 2009-10 में जमौती-जमौता गांव को अंबेडकर ग्राम घोषित किया गया था। शासन की मंशा थी कि इस केंद्र का उपयोग ग्रामसभा की बैठकों, विवाह समारोहों के लिए बारात ठहराने और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन हेतु किया जाएगा। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इस केंद्र से शादी-विवाह के दौरान होने वाली असुविधाएं कम होंगी, विशेषकर बरसात और ठंड के मौसम में। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार, केंद्र के निर्माण के बाद से आज तक यहां कोई बारात नहीं ठहरी है। ग्रामीणों के अनुसार, शुरुआत से ही कुछ प्रभावशाली लोगों का इस केंद्र पर कब्जा रहा है। केंद्र से मेज, कुर्सी और पंखे जैसे आवश्यक सामान भी गायब हो चुके हैं। भवन के गेट, खिड़की, दरवाजे, छत और फर्श पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे इसकी हालत अत्यंत खराब हो गई है। गांव के जग नारायण, हयतुल्लाह, घनश्याम, राम अजोरे, सर्वजीत और फूलचंद्र सहित अन्य ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से सामुदायिक केंद्र की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मरम्मत के बाद ही इसे इसके वास्तविक उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा। इस संबंध में ग्राम प्रधान इमरान ने बताया कि सामुदायिक विवाह घर की मरम्मत के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया।
जमौता में 14 लाख का अंबेडकर केंद्र जर्जर:दबंगों का कब्जा, ग्रामीण मरम्मत की कर रहे मांग
डुमरियागंज विकास खंड के जमौता गांव में डॉ. अंबेडकर सामुदायिक केंद्र जर्जर हालत में है। वर्ष 2009-10 में 14 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस केंद्र पर ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इसका उपयोग कृषि उपज के भंडारण के लिए किया जा रहा है, जिससे केंद्र का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। यह सामुदायिक केंद्र तब बनाया गया था जब 2009-10 में जमौती-जमौता गांव को अंबेडकर ग्राम घोषित किया गया था। शासन की मंशा थी कि इस केंद्र का उपयोग ग्रामसभा की बैठकों, विवाह समारोहों के लिए बारात ठहराने और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन हेतु किया जाएगा। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इस केंद्र से शादी-विवाह के दौरान होने वाली असुविधाएं कम होंगी, विशेषकर बरसात और ठंड के मौसम में। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार, केंद्र के निर्माण के बाद से आज तक यहां कोई बारात नहीं ठहरी है। ग्रामीणों के अनुसार, शुरुआत से ही कुछ प्रभावशाली लोगों का इस केंद्र पर कब्जा रहा है। केंद्र से मेज, कुर्सी और पंखे जैसे आवश्यक सामान भी गायब हो चुके हैं। भवन के गेट, खिड़की, दरवाजे, छत और फर्श पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे इसकी हालत अत्यंत खराब हो गई है। गांव के जग नारायण, हयतुल्लाह, घनश्याम, राम अजोरे, सर्वजीत और फूलचंद्र सहित अन्य ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से सामुदायिक केंद्र की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मरम्मत के बाद ही इसे इसके वास्तविक उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा। इस संबंध में ग्राम प्रधान इमरान ने बताया कि सामुदायिक विवाह घर की मरम्मत के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया।





































