चौहत्तर कला स्थित काली माता मंदिर परिसर में आयोजित शतचंडी महायज्ञ और संत सम्मेलन का विधिवत समापन हो गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हुए पूर्णाहुति दी गई। यज्ञ के समापन के बाद मंदिर परिसर से स्थापित कलशों की शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालु सिर पर कलश रखकर जयकारे लगाते हुए गांव के तालाब तक पहुंचे, जहां विधि-विधान से कलशों का विसर्जन किया गया। इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर कथावाचक पंडित रमेशचंद्र शास्त्री ने प्रवचन दिया। उन्होंने बताया कि शतचंडी महायज्ञ का वर्णन दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय में मिलता है। इस यज्ञ के माध्यम से महाकाली, महालक्ष्मी और मां सरस्वती से प्रार्थना की जाती है कि संसार में कोई भी प्राणी दुखी या निर्धन न रहे, तथा प्रत्येक जीव को सुख, शांति और कल्याण प्राप्त हो। उन्होंने देश के उत्थान और परम वैभव की भी कामना की। कार्यक्रम में प्रधान दीपक यादव, रामसुख, जवाहरलाल, रामनरेश, राजेंद्र, ओमप्रकाश सपत्नीक सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने कलश विसर्जन में भाग लिया। यज्ञ के समापन के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। ग्रामवासियों के विशेष सहयोग से यह आयोजन सफल रहा।
चौहत्तर कला में शतचंडी महायज्ञ का समापन:विश्व कल्याण की कामना के साथ हुई पूर्णाहुति
चौहत्तर कला स्थित काली माता मंदिर परिसर में आयोजित शतचंडी महायज्ञ और संत सम्मेलन का विधिवत समापन हो गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हुए पूर्णाहुति दी गई। यज्ञ के समापन के बाद मंदिर परिसर से स्थापित कलशों की शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालु सिर पर कलश रखकर जयकारे लगाते हुए गांव के तालाब तक पहुंचे, जहां विधि-विधान से कलशों का विसर्जन किया गया। इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर कथावाचक पंडित रमेशचंद्र शास्त्री ने प्रवचन दिया। उन्होंने बताया कि शतचंडी महायज्ञ का वर्णन दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय में मिलता है। इस यज्ञ के माध्यम से महाकाली, महालक्ष्मी और मां सरस्वती से प्रार्थना की जाती है कि संसार में कोई भी प्राणी दुखी या निर्धन न रहे, तथा प्रत्येक जीव को सुख, शांति और कल्याण प्राप्त हो। उन्होंने देश के उत्थान और परम वैभव की भी कामना की। कार्यक्रम में प्रधान दीपक यादव, रामसुख, जवाहरलाल, रामनरेश, राजेंद्र, ओमप्रकाश सपत्नीक सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने कलश विसर्जन में भाग लिया। यज्ञ के समापन के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। ग्रामवासियों के विशेष सहयोग से यह आयोजन सफल रहा।










































