सिद्धार्थनगर जनपद के खेसरहा थाना क्षेत्र में 10 साल पुराने नाबालिग दुष्कर्म मामले में सोमवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। यह मामला वर्ष 2016 का है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष पॉक्सो एक्ट) श्री बीरेन्द्र कुमार की अदालत ने नागेन्द्र यादव पुत्र कतवारु, निवासी गुल्हरिया, थाना खेसरहा को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे सात वर्ष के कठोर कारावास के साथ 46,000 रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया। इस मामले में नाबालिग के साथ दुष्कर्म, अपहरण और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप दर्ज थे। लगभग दस वर्षों तक चले मुकदमे के बाद पीड़िता को न्याय मिला। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान ठोस साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए। सरकारी वकील (अभियोजक) पवन कुमार कर पाठक ने मामले की मजबूती से पैरवी की। न्यायालय में पैरवी और दस्तावेजी प्रक्रिया को सुदृढ़ करने में मुख्य आरक्षी राजेश्वर चन्द, थाना खेसरहा की भूमिका भी सराहनीय रही। यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के मामलों में अदालत के सख्त रुख को दर्शाता है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि ऐसे गंभीर अपराधों में आरोपी न्याय से बच नहीं सकते। स्थानीय लोगों ने इस फैसले को समाज में कानून के प्रति भरोसा बढ़ाने वाला और भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक मजबूत कदम बताया है।
नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 7 साल की सजा:10 साल बाद आया फैसला, 46 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया
सिद्धार्थनगर जनपद के खेसरहा थाना क्षेत्र में 10 साल पुराने नाबालिग दुष्कर्म मामले में सोमवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। यह मामला वर्ष 2016 का है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष पॉक्सो एक्ट) श्री बीरेन्द्र कुमार की अदालत ने नागेन्द्र यादव पुत्र कतवारु, निवासी गुल्हरिया, थाना खेसरहा को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे सात वर्ष के कठोर कारावास के साथ 46,000 रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया। इस मामले में नाबालिग के साथ दुष्कर्म, अपहरण और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप दर्ज थे। लगभग दस वर्षों तक चले मुकदमे के बाद पीड़िता को न्याय मिला। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान ठोस साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए। सरकारी वकील (अभियोजक) पवन कुमार कर पाठक ने मामले की मजबूती से पैरवी की। न्यायालय में पैरवी और दस्तावेजी प्रक्रिया को सुदृढ़ करने में मुख्य आरक्षी राजेश्वर चन्द, थाना खेसरहा की भूमिका भी सराहनीय रही। यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के मामलों में अदालत के सख्त रुख को दर्शाता है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि ऐसे गंभीर अपराधों में आरोपी न्याय से बच नहीं सकते। स्थानीय लोगों ने इस फैसले को समाज में कानून के प्रति भरोसा बढ़ाने वाला और भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक मजबूत कदम बताया है।





































