बलरामपुर में सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के निर्देश पर एक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में जनपद की सभी प्रसव इकाइयों में कार्यरत चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स और एएनएम के लिए थी। कार्यशाला में डॉ. सुमन दत्त गौतम, डॉ. महेश वर्मा और डॉ. संगीता पाण्डेय ने प्रशिक्षकों के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण में सुरक्षित प्रसव प्रक्रिया, आवश्यक सावधानियां, प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार शुक्ला, डॉ. मीनाक्षी चौधरी, डॉ. बी. पी. सिंह, डीपीएम शिवेंद्र मणि त्रिपाठी, जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा, विनोद त्रिपाठी और डॉ. अनामिका सिंह सहित कई अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रसव सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में स्वास्थ्य कर्मियों की दक्षता को बढ़ाना था।
प्रसव इकाइयों के स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण:बलरामपुर में सुरक्षित प्रसव और जटिलता प्रबंधन पर कार्यशाला
बलरामपुर में सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के निर्देश पर एक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में जनपद की सभी प्रसव इकाइयों में कार्यरत चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स और एएनएम के लिए थी। कार्यशाला में डॉ. सुमन दत्त गौतम, डॉ. महेश वर्मा और डॉ. संगीता पाण्डेय ने प्रशिक्षकों के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण में सुरक्षित प्रसव प्रक्रिया, आवश्यक सावधानियां, प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार शुक्ला, डॉ. मीनाक्षी चौधरी, डॉ. बी. पी. सिंह, डीपीएम शिवेंद्र मणि त्रिपाठी, जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा, विनोद त्रिपाठी और डॉ. अनामिका सिंह सहित कई अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रसव सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में स्वास्थ्य कर्मियों की दक्षता को बढ़ाना था।






































