महाराजगंज जनपद के बृजमनगंज थाना क्षेत्र स्थित दुर्गापुर ग्राम सभा में प्रसिद्ध शक्तिपीठ लेहरा देवी मंदिर, जिन्हें मां आद्रवन वासनी भी कहा जाता है, में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दूर-दूर से आए भक्त माता दुर्गा की पूजा-अर्चना करते देखे गए। सुबह भोर से ही मां के दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय शासन-प्रशासन मुस्तैद रहा। चैत्र नवरात्रि को नव संवत्सर यानी हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से माता की आराधना करने वाले भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। तस्वीरें देखिए… हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। यह इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। 19 मार्च को सुबह का समय घटस्थापना के लिए शुभ माना जा रहा है। इस दौरान कलश स्थापित कर देवी मां का आवाहन किया जाता है।
भक्ति के रंग में रंगा लेहरा देवी मंदिर: दर्शन के लिए उमड़े हजारों श्रद्धालु, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद – Lehra(Pharenda) News
महाराजगंज जनपद के बृजमनगंज थाना क्षेत्र स्थित दुर्गापुर ग्राम सभा में प्रसिद्ध शक्तिपीठ लेहरा देवी मंदिर, जिन्हें मां आद्रवन वासनी भी कहा जाता है, में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दूर-दूर से आए भक्त माता दुर्गा की पूजा-अर्चना करते देखे गए। सुबह भोर से ही मां के दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय शासन-प्रशासन मुस्तैद रहा। चैत्र नवरात्रि को नव संवत्सर यानी हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से माता की आराधना करने वाले भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। तस्वीरें देखिए… हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। यह इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। 19 मार्च को सुबह का समय घटस्थापना के लिए शुभ माना जा रहा है। इस दौरान कलश स्थापित कर देवी मां का आवाहन किया जाता है।
































