Advertisement
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के चौखड़ा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार शाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अवध धाम से पधारे प्रख्यात कथावाचक आचार्य प्रेम शरण शास्त्री जी महाराज ने इस अवसर पर ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के मर्म पर प्रकाश डाला, जिससे भक्त भावविभोर हो गए। महाराज शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि सत्संग के बिना जीवन में ज्ञान और वैराग्य का उदय संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भक्ति की प्राप्ति भी सत्संग के माध्यम से ही होती है। कथा के दौरान उन्होंने धुंधकारी और गोकर्ण की अद्भुत कथा सुनाई। शास्त्री जी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से पितृदोष की शांति होती है और व्यक्ति को मुक्ति मिलती है। उन्होंने आत्मदेव पंडित की कहानी का उल्लेख किया, जिन्होंने पुत्र न होने के दुख में प्राण त्यागने का निश्चय किया था। एक संत की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिनमें से गोकर्ण जी महान ज्ञानी हुए, जबकि धुंधकारी दुष्ट प्रवृत्ति का निकला। मृत्यु के बाद प्रेत योनि में भटक रहे धुंधकारी को उनके भाई गोकर्ण जी ने भागवत कथा सुनाकर मुक्ति दिलाई। कथा की महिमा से धुंधकारी के लिए साक्षात वैकुंठ से विमान आया और वह भगवान के धाम को प्राप्त हुए। शास्त्री जी ने इस बात पर बल दिया कि भागवत कथा घर के समस्त दुख, दरिद्रता और पापों का नाश करती है। यह सुख-शांति और भगवद कृपा प्रदान करने वाली है। इस अवसर पर कंचन सिंह, गोपाल जी सिंह, हरेंद्र विक्रम सिंह, अरुण कुमार सिंह, मनोज सिंह, इंद्र प्रताप सिंह, संजीव कुमार सिंह, सुनील सिंह, अमरेश सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





































