बस्ती के कृषि विज्ञान केंद्र में आर्या परियोजना के तहत आयोजित सात दिवसीय मशरूम उत्पादन तकनीक प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक समापन हो गया। यह प्रशिक्षण 13 से 19 जनवरी 2026 तक चला, जिसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना था। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस.के. तोमर ने बताया कि कार्यक्रम का लक्ष्य युवाओं को कम लागत में अधिक आय देने वाले मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराना था, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस प्रशिक्षण में जनपद के विभिन्न विकासखंडों से 25 चयनित युवाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान, केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक और कोर्स कोआर्डिनेटर डॉ. प्रेम शंकर ने प्रतिभागियों को ढिंगरी, बटन और मिल्की मशरूम के उत्पादन की सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी। कृषि वानिकी वैज्ञानिक डॉ. पी.के. मिश्रा ने स्पॉन उत्पादन, सब्सट्रेट तैयार करने, बेड निर्माण, तापमान व आर्द्रता प्रबंधन, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की। गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. अंजलि वर्मा ने बताया कि मशरूम उत्पादन पोषण-सुरक्षा और आय-सृजन का एक सशक्त माध्यम है। इसमें कम भूमि, कम पानी और सीमित संसाधनों के साथ भी अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। प्रसार वैज्ञानिक आर.वी. सिंह ने प्रतिभागियों को स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ और स्टार्ट-अप मॉडल के जरिए व्यवसाय विस्तार के अवसरों के बारे में भी जानकारी दी। समापन अवसर पर, प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशिक्षण को व्यावहारिक, ज्ञानवर्धक और रोजगारोन्मुखी बताया। उन्होंने भविष्य में मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में, प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किए गए। साथ ही, उन्हें आम (पूसा लालिमा), गुलाब (खास टॉमी एटकिन, सेंसेशन) आदि प्रजातियों के पौधे भी दिए गए। आर्या परियोजना के तहत उन्हें निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।











































