एमएलके पीजी कॉलेज की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) ने महाविद्यालय के सभागार में शिक्षकों के लिए एक प्रोफेशनल डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “शिक्षण में समय प्रबंधन एवं शिक्षण में व्यावसायिक नैतिकता” रहा। इसका उद्देश्य शिक्षकों में समय प्रबंधन कौशल, नैतिक चेतना और व्यावसायिक दक्षता को मजबूत करना था, ताकि शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, उद्देश्यपूर्ण और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सके। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा मिश्रा द्वारा प्रस्तुत स्वस्ति वाचन से हुआ। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सचिव, प्राचार्य, मुख्य नियंता, मुख्य वक्ता प्रो. मुनेश कुमार (लखनऊ विश्वविद्यालय) सहित अनेक वरिष्ठ प्राध्यापक, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता प्रो. मुनेश कुमार, शिक्षा शास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में शिक्षण प्रक्रिया में समय प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समय का सुनियोजित और विवेकपूर्ण उपयोग न केवल शिक्षक की कार्यकुशलता बढ़ाता है, बल्कि शिक्षण की गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करता है। एक अनुशासित समय-सारिणी शिक्षक को अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों के बेहतर निर्वहन में सहायक होती है। व्यावसायिक नैतिकता पर बोलते हुए प्रो. कुमार ने कहा कि नैतिक मूल्य ही शिक्षक की वास्तविक पहचान होते हैं और यही उसकी सामाजिक जिम्मेदारी का आधार बनते हैं। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षक का आचरण, विचार और व्यवहार समाज को दिशा देने का कार्य करता है, इसलिए नैतिकता का पालन शिक्षक जीवन का अनिवार्य अंग होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से निरंतर स्वयं को अपडेट और अपग्रेड करते रहने का भी आह्वान किया। प्राचार्य प्रो. जे.पी. पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि समय प्रबंधन और नैतिक मूल्यों के समन्वय से ही शिक्षण कार्य प्रभावी बनता है। प्रबंध समिति के सचिव रिटायर्ड कर्नल संजीव कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की धुरी होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के समन्वयक एवं आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर प्रो. एस. पी. मिश्रा ने शिक्षण में अनुशासन, नैतिकता और समयबद्धता के महत्व पर प्रकाश डाला।
एमएलके पीजी कॉलेज में शिक्षकों का प्रोफेशनल डेवलपमेंट कार्यक्रम:समय प्रबंधन और व्यावसायिक नैतिकता पर हुआ आयोजन
एमएलके पीजी कॉलेज की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) ने महाविद्यालय के सभागार में शिक्षकों के लिए एक प्रोफेशनल डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “शिक्षण में समय प्रबंधन एवं शिक्षण में व्यावसायिक नैतिकता” रहा। इसका उद्देश्य शिक्षकों में समय प्रबंधन कौशल, नैतिक चेतना और व्यावसायिक दक्षता को मजबूत करना था, ताकि शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, उद्देश्यपूर्ण और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सके। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा मिश्रा द्वारा प्रस्तुत स्वस्ति वाचन से हुआ। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सचिव, प्राचार्य, मुख्य नियंता, मुख्य वक्ता प्रो. मुनेश कुमार (लखनऊ विश्वविद्यालय) सहित अनेक वरिष्ठ प्राध्यापक, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता प्रो. मुनेश कुमार, शिक्षा शास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में शिक्षण प्रक्रिया में समय प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समय का सुनियोजित और विवेकपूर्ण उपयोग न केवल शिक्षक की कार्यकुशलता बढ़ाता है, बल्कि शिक्षण की गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करता है। एक अनुशासित समय-सारिणी शिक्षक को अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों के बेहतर निर्वहन में सहायक होती है। व्यावसायिक नैतिकता पर बोलते हुए प्रो. कुमार ने कहा कि नैतिक मूल्य ही शिक्षक की वास्तविक पहचान होते हैं और यही उसकी सामाजिक जिम्मेदारी का आधार बनते हैं। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षक का आचरण, विचार और व्यवहार समाज को दिशा देने का कार्य करता है, इसलिए नैतिकता का पालन शिक्षक जीवन का अनिवार्य अंग होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से निरंतर स्वयं को अपडेट और अपग्रेड करते रहने का भी आह्वान किया। प्राचार्य प्रो. जे.पी. पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि समय प्रबंधन और नैतिक मूल्यों के समन्वय से ही शिक्षण कार्य प्रभावी बनता है। प्रबंध समिति के सचिव रिटायर्ड कर्नल संजीव कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की धुरी होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के समन्वयक एवं आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर प्रो. एस. पी. मिश्रा ने शिक्षण में अनुशासन, नैतिकता और समयबद्धता के महत्व पर प्रकाश डाला।



































