बहराइच जिले की नानपारा तहसील के पाठकपुरवा गांव में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) मुकेश चंद्र ने ग्रामीणों से संवाद किया। यह संवाद वन विभाग पर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में था। सीडीओ के साथ उपजिलाधिकारी नानपारा मोनालिसा जौहरी, खंड विकास अधिकारी शिवपुर अनुष्का श्रीवास्तव और डीसी मनरेगा भी मौजूद थीं। राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में टीम पाठकपुरवा के पंचायत भवन पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। ग्रामीणों को यह भी आश्वस्त किया गया कि पहले सभी को उनकी जमीन मिलेगी, उसके बाद ही जंगल लगाने का कार्य शुरू होगा। यह मामला तब सामने आया जब विगत 28 जनवरी को पाठकपुरवा गांव के सैकड़ों किसानों ने बहराइच जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए थे। किसानों का कहना था कि वन विभाग उनकी जोत भूमि पर कब्जा कर रहा है और गांव के किनारे जंगल लगाया जा रहा है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की थी कि यदि गांव के किनारे जंगल होगा, तो उसमें रहने वाले हिंसक जीव गांव के बच्चों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। निरीक्षण के दौरान गांव के सैकड़ों किसान और कई अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
पाठकपुरवा में सीडीओ ने ग्रामीणों से संवाद किया: वन विभाग पर लगे आरोपों की जांच, जमीन मिलने का आश्वासन – Majha Dariyaburd(Nanpara) News
बहराइच जिले की नानपारा तहसील के पाठकपुरवा गांव में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) मुकेश चंद्र ने ग्रामीणों से संवाद किया। यह संवाद वन विभाग पर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में था। सीडीओ के साथ उपजिलाधिकारी नानपारा मोनालिसा जौहरी, खंड विकास अधिकारी शिवपुर अनुष्का श्रीवास्तव और डीसी मनरेगा भी मौजूद थीं। राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में टीम पाठकपुरवा के पंचायत भवन पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। ग्रामीणों को यह भी आश्वस्त किया गया कि पहले सभी को उनकी जमीन मिलेगी, उसके बाद ही जंगल लगाने का कार्य शुरू होगा। यह मामला तब सामने आया जब विगत 28 जनवरी को पाठकपुरवा गांव के सैकड़ों किसानों ने बहराइच जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए थे। किसानों का कहना था कि वन विभाग उनकी जोत भूमि पर कब्जा कर रहा है और गांव के किनारे जंगल लगाया जा रहा है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की थी कि यदि गांव के किनारे जंगल होगा, तो उसमें रहने वाले हिंसक जीव गांव के बच्चों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। निरीक्षण के दौरान गांव के सैकड़ों किसान और कई अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।





































