SSB जवानों ने छात्रों संग गाया 'वन्दे मातरम':सीमावर्ती क्षेत्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता को किया सुदृढ़

2
Advertisement

श्रावस्ती: सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। सीमा चौकी ककरदरी और सोनपथरी के जवानों ने अपने कार्यक्षेत्र के सीमावर्ती विद्यालयों में छात्रों के साथ सामूहिक रूप से ‘वन्दे मातरम’ का गायन किया। इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों में देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम के दौरान, एसएसबी जवानों ने छात्रों को महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वन्दे मातरम’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अवगत कराया। उन्हें बताया गया कि यह गीत 19वीं शताब्दी में रचा गया था और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का एक प्रमुख स्रोत बना। जवानों ने छात्रों को समझाया कि ‘वन्दे मातरम’ का नारा किस प्रकार देशभर में स्वतंत्रता संग्राम के समय राष्ट्रभक्ति, साहस और बलिदान का प्रतीक बन गया था। इस गीत ने भारतीय जनमानस को एक सूत्र में बांधा और विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष के दौरान लोगों में आत्मविश्वास व एकता की भावना को मजबूत किया। छात्रों को राष्ट्रीय प्रतीकों, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्र के सम्मान से जुड़े मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों ने सशस्त्र सीमा बल की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सहायक होते हैं। यह कार्यक्रम सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय चेतना को प्रोत्साहित करने तथा युवा पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने की एसएसबी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

Advertisement