बस्ती जनपद में अखिल भारतवर्षीय गोंड महासभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने रुधौली तहसीलदार से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने धुरिया (गोंड) जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का प्रमाण पत्र जारी न किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई और शासनादेश के अनुरूप प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की। महासभा के पदाधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार के राजपत्र अनुसूचित जातियां एवं अनुसूचित जनजातियां आदेश (संशोधन) अधिनियम, 2002 तथा 23 अक्टूबर 2020 के शासनादेश के अनुसार उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में धुरिया जाति को गोंड जाति का पर्याय मानते हुए अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया है। इनमें महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र जिले शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन द्वारा धुरिया जाति के आवेदनों को कहार (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में दर्शाकर अथवा 1359 और 1366 फसली अभिलेखों का हवाला देकर निरस्त किया जा रहा है। इससे पात्र व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति से जुड़े संवैधानिक लाभों से वंचित होना पड़ रहा है। महासभा ने शासनादेश का हवाला देते हुए बताया कि 1891 की जनगणना रिपोर्ट में कहार जाति के अंतर्गत कई उपजातियां दर्ज थीं, जिनमें से कुछ अनुसूचित जाति, कुछ अनुसूचित जनजाति और कुछ अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं। शासनादेश में यह भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जाति प्रमाण पत्र जारी करते समय आवेदक की सामाजिक जांच, कुटुम्ब रजिस्टर, विद्यालयी प्रमाण पत्र, स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी), स्थलीय जांच तथा स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। महासभा के जिला अध्यक्ष बलराम गोंड ने बताया कि वर्ष 1891 में बस्ती जिले में लगभग 39,121 धुरिया समुदाय के लोग निवास करते थे, जबकि वर्तमान में उनकी संख्या लगभग तीन लाख के करीब है। इसके बावजूद उन्हें अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष गिरजाशंकर गोंड (छोटे नेता), तहसील अध्यक्ष लालचंद गोंड, तहसील सहयोजक इंद्रजीत गोंड, ब्लॉक अध्यक्ष आकाश गोंड, ब्लॉक संयोजक राजकुमार गौड़, अरुण कुमार, धर्मेंद्र गौड़, फूलचंद गौड़ सहित बड़ी संख्या में महासभा के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। महासभा ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही धुरिया (गोंड) जाति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया, तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।






































