भारत रत्न संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और महान संत गाडगे के परिनिर्वाण दिवस पर रविवार को मुंडेरवा नगर पंचायत के अम्बेडकर नगर बोदवल में एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का संयोजन संत रविदास सेवा समिति के सदस्यों ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार ने बाबासाहेब अम्बेडकर को एक कानूनी विद्वान, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक बताया। उन्होंने कहा कि संत गाडगे और बाबासाहेब का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ओमबीर हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. अर्चना चौधरी ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अपना पूरा जीवन मानवाधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनकी मुख्य चिंता दलित समुदाय के लोगों के मौलिक अधिकार दिलाना था, जिसके लिए उन्होंने अंतिम सांस तक संघर्ष किया। डॉ. अर्चना ने विशेष रूप से महिलाओं से महापुरुषों के जीवन संघर्ष और संदेशों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। मुंडेरवा के चेयरमैन प्रतिनिधि अजय सिंह ‘टिकू’ ने कहा कि बाबासाहेब और संत गाडगे ने समाज के दबे-कुचले और विपन्न वर्ग को ज्ञान की नई रोशनी दी। उन्होंने बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षित करने का संदेश दिया, क्योंकि शिक्षा ही समाज की कुरीतियों को समाप्त कर सकती है। विशिष्ट अतिथि बुद्धि प्रकाश एडवोकेट और बी.आर. फाउन्डेशन के चेयरमैन के.पी. राठौर ने बताया कि संत गाडगे बाबा और बाबासाहेब अम्बेडकर दोनों के संदेश सामाजिक न्याय, शिक्षा और अंधविश्वास उन्मूलन पर केंद्रित थे। उन्होंने कहा कि गाडगे बाबा ने स्वच्छता, भाईचारे और शिक्षा पर जोर दिया, जबकि अम्बेडकर ने ‘शिक्षित बनो, संगठित हो, आंदोलन करो’ का नारा दिया। दोनों ने जातिवाद और पाखंड का विरोध करते हुए दलितों के उत्थान के लिए कार्य किया। गाडगे बाबा ने अम्बेडकर के कार्यों को अपना ‘जीवित कार्य’ घोषित किया था और उनके निधन पर दुखी होकर अन्न-जल त्याग दिया था।






































