बलरामपुर में जननी सुरक्षा योजना का भुगतान अटका:11 हजार से अधिक प्रसूताएं प्रोत्साहन राशि के इंतजार में, कुल 27,153 संस्थागत प्रसव हुए

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बलरामपुर में जननी सुरक्षा योजना(जेएसवाई)के तहत प्रोत्साहन राशि के भुगतान में देरी हो रही है। जिले में एक वर्ष के भीतर संस्थागत प्रसव कराने वाली 11 हजार से अधिक महिलाओं को अभी तक यह राशि नहीं मिल पाई है।सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही है,लेकिन समय पर लाभ न मिलने से इस प्रयास पर सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक,अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जिले में कुल 27,153 संस्थागत प्रसव हुए।इनमें से केवल 15,409 प्रसूताओं के खातों में ही जेएसवाई की धनराशि भेजी जा सकी है।शेष 11,744महिलाएं अभी भी भुगतान का इंतजार कर रही हैं।विभागीय अधिकारी इस देरी का कारण पोर्टल में तकनीकी खामियों को बता रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत शहरी क्षेत्र की प्रसूताओं को 1,400 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1,000 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जाते हैं।जिले में अधिकतर प्रसव जिला महिला अस्पताल में होते हैं,जबकि संयुक्त जिला चिकित्सालय में भी यह सुविधा उपलब्ध है।जटिल प्रसव के लिए सर्जन की व्यवस्था के साथ उतरौला, पचपेड़वा और तुलसीपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित पांच फर्स्ट रेफरल यूनिट भी संचालित हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप संस्थागत प्रसव की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।हालांकि,प्रसव के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि समय पर न मिलने से लाभार्थियों में असंतोष बढ़ रहा है। जिले में प्रसव सेवाओं का नेटवर्क मजबूत करने के लिए जिला और ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कुल 130 प्रसव इकाइयां स्थापित की गई हैं।इन इकाइयों में एएनएम,आशा कार्यकर्ता और चिकित्सकों द्वारा प्रसव पूर्व देखभाल,टीकाकरण और सुरक्षित प्रसव की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं,लेकिन जेएसवाई भुगतान में देरी इस व्यवस्था की एक कमजोर कड़ी साबित हो रही है। नवंबर 2025 तक 23,706 प्रसव के सापेक्ष 12,589 महिलाओं को जेएसवाई का लाभ मिला था।दिसंबर तक प्रसव की संख्या बढ़कर 27,153 हो गई,जबकि लाभार्थियों की संख्या केवल 15,409 तक ही पहुंच सकी।इससे स्पष्ट होता है कि एक माह में लंबित मामलों की संख्या में और वृद्धि हुई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी का कहना है कि जननी सुरक्षा योजना की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा रही है। पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों और लाभार्थियों के बैंक खाते या आधार में त्रुटि के कारण भुगतान अटक जाता है। सभी चिकित्सा इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र प्रसूताओं को शीघ्र योजना का लाभ दिलाया जाए।
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