मुंडेरवा थाना क्षेत्र के परासी निवासी बाबूलाल चौधरी ने पुलिस पर मुकदमा दर्ज न करने का आरोप लगाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय के आदेश पर अब पांच ज्ञात और दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बाबूलाल ने आरोप लगाया था कि मुंडेरवा पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने न्यायालय द्वितीय अतिरिक्त एसीजेएम में फौजदारी वाद दाखिल किया, जिसमें सूर्यनाथ चौधरी, रीमा, विवेक, सीताराम, राजमणि चौधरी और दो अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया। बाबूलाल के अनुसार, 9 जनवरी 2025 को दोपहर करीब तीन बजे ये सभी आरोपी एकराय होकर लोहे की रॉड और डंडों के साथ उनके घर आए। उन्होंने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और मारपीट शुरू कर दी। जब बाबूलाल जान बचाने के लिए घर में भागे, तो आरोपी घर में घुस गए और तोड़फोड़ कर काफी नुकसान पहुंचाया। चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे और बाबूलाल की जान बचाई। घटना के बाद 112 पर पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें थाने जाने को कहकर चली गई। बाबूलाल ने 9 नवंबर 2025 को घटना की सूचना थाने और रजिस्टर्ड डाक से पुलिस अधीक्षक को भी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद बाबूलाल ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने उनके प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष मुंडेरवा को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। 24 नवंबर 2025 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुपालन में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 115(2), 352, 351(3), 324(4) और 333 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की है।





































