रुधौली बस्ती के बुढ़िया समय माता मंदिर, परसा तिवारी में गुरुवार को नवदिवसीय श्रीराम कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। कलश यात्रा के बाद विद्वान पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन संपन्न कराया। कथा के आरंभ से पूर्व, मुख्य यजमान ज्योतिषाचार्य आदर्श तिवारी और भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नितीश पाण्डेय ‘मनु पंडित’ ने कथा व्यास एवं उनके सहयोगी आचार्यों का स्वागत किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विष्णुकांत शुक्ल ने कथा व्यास के रूप में श्रीराम कथा के प्रथम प्रसंग में राम नाम की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राम नाम अविनाशी है और यह सृष्टि के अस्तित्व का आधार है। डॉ. शुक्ल के अनुसार, संसार की परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन राम नाम की महिमा सदा अटल रहती है। डॉ. शुक्ल ने आगे बताया कि राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि सबसे बड़ा मंत्र है। उन्होंने उल्लेख किया कि भगवान शिव स्वयं निरंतर राम नाम का जप करते हैं। उनके अनुसार, सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और वायु की ऊर्जा भी राम नाम से ही संचालित होती है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती की कथा का भी जिक्र किया, जिसमें श्रद्धा और विश्वास को उनके मूल स्वरूप बताया गया। डॉ. शुक्ल ने कहा कि शब्द ब्रह्म है, इसलिए मनुष्य को शब्दों का प्रयोग संयम और मर्यादा के साथ करना चाहिए। उन्होंने यह भी समझाया कि जब जीवन से अभिमान समाप्त होता है, तब श्रद्धा स्वतः जागृत हो जाती है। कथा व्यास ने मानव जीवन के प्रत्येक संस्कार में राम नाम की उपस्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जन्म के समय राम नाम का सोहर, विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर राम के गीत और अंतिम यात्रा में भी राम नाम का ही घोष किया जाता है। डॉ. शुक्ल ने कहा कि राम सबमें हैं और राम में शिव हैं, तथा श्रीराम को शिव का महामंत्र माना गया है। डॉ. शुक्ल ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि “श्रीराम के चित्र के साथ उनके चरित्र को तथा चरणों के साथ उनके आचरण को भी अपनाने की आवश्यकता है।” इस अवसर पर रामचंद्र तिवारी और अरविंद त्रिपाठी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
रुधौली के परसा तिवारी में राम कथा शुरू:नवदिवसीय राम कथा का कलश यात्रा से शुभारंभ
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