बलरामपुर के उतरौला में गुरुवार को दिन में 12 बजे से लेकर शाम 5:30 बजे तक कांग्रेस ने “मनरेगा बचाओ अभियान” के तहत तीन ग्राम पंचायतों में चौपाल और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए। शुक्रवार को मधपुर, गोवर्धनपुर और कंचनपुर ग्राम पंचायतों में आयोजित इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रमिकों ने भाग लिया और मनरेगा से संबंधित अपनी समस्याओं को साझा किया। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर मनरेगा कानून को कमजोर करने का आरोप लगाया। चौपाल को संबोधित करते हुए प्रदेश महासचिव-पूर्व विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह ‘धीरू’ ने कहा कि वर्तमान सरकार मनरेगा कानून में लगातार बदलाव कर रही है, जिससे यह योजना कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा मनरेगा जैसे रोजगार अधिकार कानून को धीरे-धीरे खत्म करने की है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों के अधिकार असुरक्षित हो जाएंगे। एआईसीसी सदस्य और पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजबहादुर यादव ने मनरेगा के तहत काम की उपलब्धता में कमी और मजदूरी भुगतान में लगातार देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तकनीकी जटिलताओं और डिजिटल प्रक्रियाओं के कारण गरीब, दलित और वंचित वर्ग के श्रमिकों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जिला अध्यक्ष शिवलाकर कोरी ने मनरेगा को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस योजना को कमजोर किया गया, तो गांवों में बेरोजगारी, पलायन और गरीबी बढ़ेगी। कोरी ने सरकार से मनरेगा कानून की मूल भावना के अनुरूप श्रमिकों को 100 दिन का रोजगार और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। चौपाल के दौरान, श्रमिकों ने जॉब कार्ड, कार्य की मांग, मजदूरी भुगतान में देरी और प्रशासनिक उदासीनता जैसी कई समस्याएं उठाईं। कांग्रेस नेताओं ने श्रमिकों को आश्वासन दिया कि “मनरेगा बचाओ अभियान” के माध्यम से उनकी आवाज़ को शासन-प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाएगा। इस अवसर पर भीष्म सिंह, प्रदीप शर्मा, मंजूर कुरैशी, ओम प्रकाश, पवन कुमार, राकेश त्रिपाठी, मारकंडे मिश्र सहित कई अन्य कांग्रेस नेता और ग्रामीण उपस्थित रहे।
कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ अभियान में चौपाल लगाई:उतरौला की तीन ग्राम सभाओं में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित
बलरामपुर के उतरौला में गुरुवार को दिन में 12 बजे से लेकर शाम 5:30 बजे तक कांग्रेस ने “मनरेगा बचाओ अभियान” के तहत तीन ग्राम पंचायतों में चौपाल और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए। शुक्रवार को मधपुर, गोवर्धनपुर और कंचनपुर ग्राम पंचायतों में आयोजित इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रमिकों ने भाग लिया और मनरेगा से संबंधित अपनी समस्याओं को साझा किया। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर मनरेगा कानून को कमजोर करने का आरोप लगाया। चौपाल को संबोधित करते हुए प्रदेश महासचिव-पूर्व विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह ‘धीरू’ ने कहा कि वर्तमान सरकार मनरेगा कानून में लगातार बदलाव कर रही है, जिससे यह योजना कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा मनरेगा जैसे रोजगार अधिकार कानून को धीरे-धीरे खत्म करने की है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों के अधिकार असुरक्षित हो जाएंगे। एआईसीसी सदस्य और पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजबहादुर यादव ने मनरेगा के तहत काम की उपलब्धता में कमी और मजदूरी भुगतान में लगातार देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तकनीकी जटिलताओं और डिजिटल प्रक्रियाओं के कारण गरीब, दलित और वंचित वर्ग के श्रमिकों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जिला अध्यक्ष शिवलाकर कोरी ने मनरेगा को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस योजना को कमजोर किया गया, तो गांवों में बेरोजगारी, पलायन और गरीबी बढ़ेगी। कोरी ने सरकार से मनरेगा कानून की मूल भावना के अनुरूप श्रमिकों को 100 दिन का रोजगार और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। चौपाल के दौरान, श्रमिकों ने जॉब कार्ड, कार्य की मांग, मजदूरी भुगतान में देरी और प्रशासनिक उदासीनता जैसी कई समस्याएं उठाईं। कांग्रेस नेताओं ने श्रमिकों को आश्वासन दिया कि “मनरेगा बचाओ अभियान” के माध्यम से उनकी आवाज़ को शासन-प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाएगा। इस अवसर पर भीष्म सिंह, प्रदीप शर्मा, मंजूर कुरैशी, ओम प्रकाश, पवन कुमार, राकेश त्रिपाठी, मारकंडे मिश्र सहित कई अन्य कांग्रेस नेता और ग्रामीण उपस्थित रहे।





































