इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे और कर्बला के महान शहीद हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर वक्फ बोर्ड शाह आलमगीर सानी इमामबाड़ा परिसर हल्लौर को भव्य रूप से सजाया गया। रंग-बिरंगी झालरों और आकर्षक लाइटों से यह ऐतिहासिक परिसर आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर नजर आया। इस पावन अवसर पर मौलाना शहकार हुसैन जैदी के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के जन्मदिन की खुशी में केक काटा गया। केक कटते ही पूरे परिसर में “इमाम हुसैन जिंदाबाद” और “या हुसैन” के नारों की गूंज सुनाई दी, जिससे माहौल पूरी तरह से रूहानी हो उठा। मौलाना शहकार हुसैन जैदी ने अपने संबोधन में कहा कि हजरत इमाम हुसैन अ.स. का जीवन मानवता, इंसाफ, सच्चाई और कुर्बानी की मिसाल है। उन्होंने ज़ुल्म और अन्याय के खिलाफ खड़े होकर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए किसी भी कुर्बानी से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनका जीवन आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम में मौजूद अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन अ.स. की शहादत और उनके आदर्शों को याद किया। इस दौरान आपसी भाईचारे, अमन और मोहब्बत का संदेश दिया गया। दुआओं का सिलसिला भी चला, जिसमें देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की कामना की गई। इमामबाड़ा परिसर में मौजूद बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने एक-दूसरे को इमाम हुसैन अ.स. के जन्मदिवस की मुबारकबाद दी। कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ किया गया।
इमाम हुसैन के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम आयोजित:हल्लौर में वक्फ बोर्ड इमामबाड़ा परिसर में मनाया गया जश्न, काटा गया केक
इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे और कर्बला के महान शहीद हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर वक्फ बोर्ड शाह आलमगीर सानी इमामबाड़ा परिसर हल्लौर को भव्य रूप से सजाया गया। रंग-बिरंगी झालरों और आकर्षक लाइटों से यह ऐतिहासिक परिसर आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर नजर आया। इस पावन अवसर पर मौलाना शहकार हुसैन जैदी के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के जन्मदिन की खुशी में केक काटा गया। केक कटते ही पूरे परिसर में “इमाम हुसैन जिंदाबाद” और “या हुसैन” के नारों की गूंज सुनाई दी, जिससे माहौल पूरी तरह से रूहानी हो उठा। मौलाना शहकार हुसैन जैदी ने अपने संबोधन में कहा कि हजरत इमाम हुसैन अ.स. का जीवन मानवता, इंसाफ, सच्चाई और कुर्बानी की मिसाल है। उन्होंने ज़ुल्म और अन्याय के खिलाफ खड़े होकर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए किसी भी कुर्बानी से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनका जीवन आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम में मौजूद अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन अ.स. की शहादत और उनके आदर्शों को याद किया। इस दौरान आपसी भाईचारे, अमन और मोहब्बत का संदेश दिया गया। दुआओं का सिलसिला भी चला, जिसमें देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की कामना की गई। इमामबाड़ा परिसर में मौजूद बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने एक-दूसरे को इमाम हुसैन अ.स. के जन्मदिवस की मुबारकबाद दी। कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ किया गया।





































