बहराइच के लखैया कला और नानपारा क्षेत्र में आवारा पशु किसानों के लिए एक गंभीर समस्या बन गए हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान अपनी खड़ी फसलों को बचाने के लिए रातभर खेतों में रखवाली करने को मजबूर हैं। छुट्टा गाय और बैल रात के अंधेरे में खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। राधेश्याम, गोपाल, बनवारी, लालजी, हनुमान और सच्चिदानंद मिश्रा जैसे स्थानीय किसानों ने बताया कि वे अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों के बाहर दर्जनों गायों को बांधकर लाठी-डंडों के साथ पहरा दे रहे हैं। इस मजबूरी के कारण कई बुजुर्ग और युवा किसान ठंड की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन वे खेत छोड़कर नहीं जा सकते। किसानों की इस समस्या की जानकारी मिलने पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि पंकज जायसवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों से बात करके समाधान का आश्वासन दिया। जायसवाल ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए इसके स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। किसानों ने सुझाव दिया कि यदि गांव स्तर पर प्रभावी गौशालाएं संचालित की जाएं और आवारा जानवरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए, तो इस समस्या का समाधान संभव है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
आवारा पशुओं से फसलें बर्बाद, किसान रातभर रखवाली को मजबूर: बहराइच में कड़ाके की ठंड के बावजूद खेतों में जाग रहे अन्नदाता – Lakhahiya Kalan(Nanpara) News
बहराइच के लखैया कला और नानपारा क्षेत्र में आवारा पशु किसानों के लिए एक गंभीर समस्या बन गए हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान अपनी खड़ी फसलों को बचाने के लिए रातभर खेतों में रखवाली करने को मजबूर हैं। छुट्टा गाय और बैल रात के अंधेरे में खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। राधेश्याम, गोपाल, बनवारी, लालजी, हनुमान और सच्चिदानंद मिश्रा जैसे स्थानीय किसानों ने बताया कि वे अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों के बाहर दर्जनों गायों को बांधकर लाठी-डंडों के साथ पहरा दे रहे हैं। इस मजबूरी के कारण कई बुजुर्ग और युवा किसान ठंड की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन वे खेत छोड़कर नहीं जा सकते। किसानों की इस समस्या की जानकारी मिलने पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि पंकज जायसवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों से बात करके समाधान का आश्वासन दिया। जायसवाल ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए इसके स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। किसानों ने सुझाव दिया कि यदि गांव स्तर पर प्रभावी गौशालाएं संचालित की जाएं और आवारा जानवरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए, तो इस समस्या का समाधान संभव है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा।






































