मिश्रौलिया ताल में सारस पक्षियों का जमावड़ा: ठंड बढ़ने के साथ बढ़ी संख्या, वन विभाग कर रहा निगरानी – Bahuar(Nichlaul) News

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सोहगी बरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल वन क्षेत्र स्थित मिश्रौलिया ताल में ठंड का मौसम शुरू होते ही सारस पक्षियों के झुंड दिखने लगे हैं। प्रभागीय वन अधिकारी सर्वे निरंजन राजेंद्र ने बताया कि ये पक्षी जलीय और दलदली क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं। सारस पक्षी मुख्य रूप से तालाबों, झीलों, नदियों और तराई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी होने के साथ ही, यह उड़ने वाले पक्षियों में दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी है। इन पक्षियों की एक खास विशेषता यह है कि ये हमेशा जोड़ों में रहते हैं। यदि एक साथी खो जाए, तो दूसरा जोड़ा नहीं बनाता। सारस जून में जोड़े बनाते हैं और जून के पहले सप्ताह से अगस्त तक अंडे देने का क्रम चलता है। ये वर्ष में एक या दो अंडे देते हैं, जिनकी देखभाल नर और मादा दोनों मिलकर करते हैं। अगस्त और सितंबर के बीच बच्चे निकलना शुरू हो जाते हैं। वन विभाग इन पक्षियों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके तहत स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है और वन विभाग के कर्मी इनके घोंसलों की निगरानी करते हैं। स्थानीय किसानों, जिनमें हरिओम पांडेय, सद्दाम हुसैन, टीपू सुल्तान, आसिफ शेख, दीपक तिवारी, राजेश, विजय पासवान और तनवीर शामिल हैं, ने बताया कि ठंड बढ़ने के साथ ही मिश्रौलिया ताल में सारस पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये पक्षी यहां के वातावरण का आनंद ले रहे हैं, और इनके झुंड को देखकर लोग अपने मोबाइल में तस्वीरें कैद कर रहे हैं।
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