गिलौला में बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा:श्रद्धा और उल्लास के साथ ज्ञान की देवी की आराधना की गई

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श्रावस्ती जनपद के गिलौला क्षेत्र में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। माघ शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर क्षेत्र के गांवों, कस्बों, विद्यालयों और घरों में ज्ञान की देवी माता सरस्वती की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही पूजा स्थलों पर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। सुबह स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने माता सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित कीं। उन्होंने पीले वस्त्र, पीले पुष्प, अक्षत, धूप-दीप अर्पित कर विधिवत पूजा की। मंत्रोच्चारण और सरस्वती वंदना के साथ भक्तों ने माता से विद्या, बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बसंत पंचमी के अवसर पर पीले रंग का विशेष महत्व होता है। इसी कारण लोगों ने पीले वस्त्र धारण किए और घरों व मंदिरों को पीले फूलों से सजाया गया। क्षेत्र के कई विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए। विद्यार्थियों ने माता सरस्वती की पूजा की और अपनी पुस्तकों तथा लेखन सामग्री को माता के चरणों में अर्पित किया। इस अवसर पर छोटे बच्चों का अक्षराभ्यास संस्कार भी कराया गया, जिसे शुभ माना जाता है। पूजा के उपरांत माता को पीले रंग के भोग और प्रसाद चढ़ाए गए, जिनमें खीर, लड्डू और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने इन धार्मिक कार्यक्रमों में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। मान्यता के अनुसार, बसंत पंचमी से बसंत ऋतु का आगमन होता है और यह दिन नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। गिलौला क्षेत्र में यह पर्व शांति, सौहार्द और धार्मिक आस्था के साथ संपन्न हुआ।

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