परसा तिवारी स्थित बुढ़िया समय माता मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। ख्याति प्राप्त कथावाचक डॉ. विष्णुकांत शुक्ल जी महाराज ने शिव विवाह प्रसंग को भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया, जिससे पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। इस कथा का आयोजन आदर्श तिवारी और नीतीश पाण्डेय उर्फ मन्नू पंडित के संयोजन में किया गया है। डॉ. विष्णुकांत शुक्ल जी महाराज ने अपने प्रवचन में भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़े विभिन्न तीर्थ स्थलों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने माता सती के त्याग, भगवान शिव की तपस्या और कामदेव के दहन की कथा भी सुनाई। महाराज ने कहा कि कथा सुनने से जीवन की व्यथा समाप्त होती है और मन को शांति मिलती है। कथा वाचक ने बताया कि माता पार्वती के पुनर्जन्म के बाद जब महादेव से उनके विवाह का समय आया, तो देवताओं और समस्त लोकों में उत्साह फैल गया। जब शिव बारात लेकर हिमालय पहुंचे, तो देवी पार्वती को कुछ भय हुआ। हालांकि, नारद जी के आगमन और पूर्व जन्म की कथा सुनाने के बाद उनका भय दूर हो गया। अंततः शिव-पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। कथा के दौरान डॉ. शुक्ल ने कहा कि उन्होंने अनेक स्थानों पर कथा सुनाई है, लेकिन परसा तिवारी जैसी श्रद्धा और अनुशासन कहीं नहीं देखा। उनके द्वारा गाए गए भक्ति भजनों ने ऐसा वातावरण बनाया कि उपस्थित महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी भक्ति में लीन हो गए। “भवसागर से पार उतारे, नाम राम का प्यारा” जैसे भजन गूंजते ही पूरा पंडाल नृत्य और जयघोष से भर गया। भक्तगण भक्ति रस में डूबे नजर आए; कुछ ताली बजा रहे थे तो कुछ आंखों में आंसू लिए प्रभु नाम का गुणगान कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य यजमान आदर्श तिवारी, पूनम त्रिपाठी, श्रीराम चंद्र शुक्ल, रविप्रकाश तिवारी, आकाश मिश्रा, हियुवा जिला मंत्री महेंद्र तिवारी, शशि भूषण सिंह, नीतीश पाण्डेय उर्फ मन्नू पंडित और पंकज त्रिपाठी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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